जशपुर। जशपुर जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग की लापरवाही आम हो गई है । उत्कृष्ट शिक्षा के लिए सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट आत्मानंद स्कूल का संचालन करने में जिले के शिक्षा अधिकारी नाकाम नजर आ रहे हैं। स्कूलों में न तो प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही उन्हें बाल अधिकारों का ज्ञान है। मामला है जशपुर जिले के कांसाबेल स्थित आत्मानंद स्कूल की एक छात्रा का जहां छात्रा को शिक्षकों के बीच इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या का असफल प्रयास कर लिया।

मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को आत्मानंद स्कूल कांसाबेल में कक्षा नवमीं की परीक्षा चल रही थी। इस दौरान नवमीं कक्षा की एक छात्रा मोबाईल के साथ परीक्षा में बैठ गई। यह बात जब वहां ड्यूटी कर रही महिला शिक्षिका को पता चली तो उसने छात्रा से मोबाईल ले लिया और उसके पर्सनल मैसेज को देखने के बाद मोबाईल प्रिंसिपल के पास जब्त करा दिया। प्रिंसिपल तेज कुमार केरकेट्टा ने छात्रा के पिता इस घटना की जानकारी देकर स्कूल बुला लिया। यहां उपस्थित स्टाफ के समक्ष शिक्षकों व प्रिंसिपल के द्वारा छात्रा के मोबाईल मैसेजों को सरेआम सार्वजनिक किया गया। यहां छात्रा के पिता को भी मोबाईल के चैट्स दिखाए गए, जिससे छात्रा के पिता ने नाराजगी जाहिर करते हुए छात्रा को चांटा रसीद कर दिया, जिससे छात्रा मानसिक अवसाद से ग्रसित हो गई।

हालांकि प्रिंसिपल ने अपनी गलती स्वीकारी और कहा कि इस तरह सार्वजनिक रूप से छात्रा के मोबाईल चैट्स सार्वजनिक करना गलत है, हालांकि उनके शिक्षकों ने ऐसा किया। आगे ऐसा न हो इसका वे ध्यान रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल में मोबाईल व स्कूटी पर पूर्णतः प्रतिबंध है इसके बावजूद बच्चे ले आते हैं। बहरहाल, परीक्षा के दौरान छात्रा के पास मोबाईल मिलने पर उसकी काउंसलिंग कर जब्त कर उसे परिजनों के समक्ष सौंपने की कार्यवाही की जानी थी। ठीक इसके विपरीत बाल अधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए आत्मानंद स्कूल के शिक्षकों ने सरेआम मोबाईल के मैसेज को सार्वजनिक कर छात्रा को जलील कर दिया।
इस घटना के बाद प्रिंसिपल ने मोबाईल छात्रा को सौंप दिया जिसके बाद वह अपनी बहन के साथ घर चली गई। अपनी बहन को घर छोड़कर छात्रा वापस लौटी और उसने पेमला स्थित मैनी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या का असफल प्रयास किया। जब छात्रा ने नदी में छलांग लगाई तो उसकी बहन ढूंढते हुए वहां तक पहुंची और पास में मवेशी चरा रहे एक चरवाहे की मदद से उसको नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद उसे इलाज के लिए कांसाबेल अस्पताल ले जाया गया जहां छात्रा का इलाज चल रहा है। परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी जिस पर पुलिस ने पहले छात्रा का ईलाज कराने की बात कहीं। जब मामले में शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार से बात की गई तो उन्होंने प्रिंसिपल से जानकारी लेकर कार्यवाही की बात कही है।
क्या कहते हैं यादव
छात्रा को काउंसलिंग की आवश्यकता है। इस प्रकार बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बाल अधिकारों के विपरीत है। मामले में बाल कल्याण समिति संज्ञान लेकर कार्यवाही करेगी : चंद्रशेखर यादव, डीसीपीओ, जशपुर
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