रायगढ़: धरमजयगढ़ कांड के आरोपी अब तक पहुंच से दूर, दस महीने पहले के मामले को भूल गई पुलिस
रायगढ़। रायगढ़ जिले के आदिवासी इलाकों में फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाला एक गिरोह लंबे समय से सक्रिय है। लैलूंगा और धरमजयगढ़ में इनकी सक्रियता अधिक है। धरमजयगढ़ में तो अगस्त 2021 में एक एफआईआर भी दर्ज की गई, लेकिन अब तक इसके सरगना का पता नहीं लगाया जा सका है। बिल्कुल असली की तरह दिखने वाले जाली सर्टिफिकेट बनाकर बेरोजगारों से हजारों रुपए वसूलने वाला एक गैंग लंबे समय से सक्रिय है। फर्जी सर्टिफिकेट की सहायता से कई लोगों को नौकरियां भी दिलाई जा चुकी हैं। ऐसा ही एक मामला धरमजयगढ़ में सामने आया था। रोजगार सहायक भर्ती में छह आवेदकों के डीसीए का सर्टिफिकेट फर्जी मिला था। 19 ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायक की भर्ती के लिए 31 दिसंबर 2020 को विज्ञापन जारी किया गया था। एक आवेदक के प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत हुई तो सभी पात्र आवेदकों के प्रमाण पत्रों का सीवी रमन विवि बिलासपुर से कराया गया। छह आवेदकों के नाम पर कोई सर्टिफिकेट नहीं मिला। उनके प्रमाण पत्र जाली थे।

जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। पुलिस ने केवल छह आवेदकों अजय कुमार पटेल, प्रतिभा नाग, नैहर साय एक्का, विनियत कुमार एक्का, बबिता बाई और हेमा यादव के विरुद्ध धारा 420, 471 के तहत अपराध दर्ज किया था, लेकिन सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह को छोड़ दिया गया। अब पुलिस को गिरोह का पता लगाने में नाकामी ही मिल रही है।
अब फिर से सक्रिय हुआ सरगना
जब यह मामला सामने आया था तो एफआईआर रुकवाने के लिए बरमकेला थाने में दर्ज अपराध का मुख्य आरोपी पूर्व पीओ यादव धरमजयगढ़ थाने पहुंचा था। उसने कई तरह से एफआईआर रोकने की कोशिश की। कुछ दिनों तक सर्टिफिकेट बनाने वाला गिरोह चुप बैठा रहा। अब फिर से गैंग के सक्रिय होने की खबर है। जब भी पंचायत स्तर पर या संविदा पदों पर भर्ती होती है तो गिरोह एक्टिव हो जाता है।




