सारंगढ़ :
पत्रकारिता का असली धर्म केवल सवाल उठाना ही नहीं, बल्कि सच की तह तक जाकर निष्पक्ष रूप से दूध का दूध और पानी का पानी करना भी है। छात्र अश्वनी चौधरी की खरसिया रेलवे ट्रैक पर हुई संदेहास्पद मौत के बाद जब चारों तरफ आक्रोश और संशय का माहौल था, तब ‘रायगढ़ टाईम्स’ ने शुरुआती रिपोर्ट में परिजनों के दर्द को आवाज देते हुए स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर कड़े सवाल दागे थे।
लेकिन, एक जिम्मेदार और निष्पक्ष समाचार माध्यम के रूप में रायगढ़ टाईम्स ने अपनी पड़ताल को वहीं नहीं रोका। जब संस्थान की टीम ने गहराई से छानबीन की और के.पी. स्कूल के संचालक के सहयोग से उनके द्वारा बताये गये स्कूल एवं हॉस्टल के मूल अभिलेखों की पड़ताल की, तो घटना से जुड़े कई चौंकाने वाले और स्पष्ट दस्तावेज सामने आए, जिन्होंने पूरी कहानी का रुख ही बदल दिया है।

रजिस्टरों ने तोड़ा झूठ का तिलिस्म-
हमने जब के.पी. स्कूल और हॉस्टल के आधिकारिक रिकॉर्ड्स को अपनी पैनी नजर से देखा, तो यह साफ हो गया कि प्रबंधन पर लगाए जा रहे लापरवाही के आरोप निराधार थे!
छात्र 25 अगस्त को दोपहर 1:37 बजे विधिवत हस्ताक्षर कर रक्षाबंधन अवकाश के लिए अपने गांव जगलबेड़ा (सरायपाली) गया था।
कक्षा 11वीं (कॉमर्स) की दैनिक उपस्थिति पंजिका में 1 सितंबर से लगातार छात्र की अनुपस्थिति (A) दर्ज है। 31 अगस्त की अनुपस्थित छात्रों की अधिकृत सूची में भी उसका नाम स्पष्ट दर्ज है, जिससे सिद्ध होता है कि स्कूल में उपस्थिति को लेकर कोई ढिलाई नहीं थी। स्कूल या हॉस्टल के किसी भी इनवर्ड रजिस्टर में छात्र के वापस लौटने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
‘हॉस्टल पहुंच गया हूँ’ और ‘गुरुजी’ का दावा निकला भ्रामक-
रायगढ़ टाईम्स की पड़ताल में यह सबसे बड़ा तथ्य सामने आया है कि अश्वनी सारंगढ़ बस स्टैंड तक तो पहुंचा, लेकिन वह स्कूल या हॉस्टल की दहलीज तक गया ही नहीं। छात्र द्वारा परिजनों को फोन पर यह कहना कि “हॉस्टल पहुंच गया हूँ” और बाद में अनजान नंबर से यह संदेश देना कि “गुरुजी के साथ घूमने जा रहा हूँ” पूरी तरह गुमराह करने वाला साबित हुआ। स्कूल के किसी भी शिक्षक के साथ छात्र का कोई संपर्क नहीं हुआ था। सवाल यह उठता है कि आखिर किस डर, दबाव या बहकावे में आकर छात्र ने अपने परिजनों को यह झूठी तसल्ली दी?
सारंगढ़ अंचल का प्रतिष्ठित संस्थान ‘के.पी. स्कूल एवं हॉस्टल बंधापाली’ अपने कड़े अनुशासन और पारदर्शी व्यवस्था के लिए जाना जाता है। हॉस्टल लीविंग रजिस्टर, कक्षा हाजिरी और अनुपस्थित छात्रों की लिखित डायरी का इतना व्यवस्थित संधारण यह प्रमाणित करता है कि स्कूल स्तर पर कोई चूक नहीं हुई थी। जब छात्र परिसर के भीतर दाखिल ही नहीं हुआ, तो हॉस्टल प्रबंधन पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ना अनुचित है।
प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अपने सभी वैध दस्तावेज और रजिस्टर जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करने कि बात कही है।
रायगढ़ टाईम्स कि अपील असली दोषियों की तलाश जरूरी-
एक निष्पक्ष मीडिया संस्थान के नाते रायगढ़ टाईम्स यह स्पष्ट करता है कि अब जांच का रुख उन सवालों पर होना चाहिए जो वास्तव में इस मौत के रहस्य से जुड़े हैं,
जैसे -सारंगढ़ बस स्टैंड से खरसिया की ओर अश्वनी को कौन और क्यों ले गया?
जिस अज्ञात नंबर से परिजनों को कॉल किया गया था, वह किसका है?
क्या छात्र किसी साइबर जालसाजी, नशा गिरोह या आपराधिक सिंडिकेट के चंगुल में फंस चुका था?
रायगढ़ टाईम्स पुलिस प्रशासन से मांग करता है कि अज्ञात मोबाइल की सीडीआर और बस स्टैंड से लेकर रेलवे ट्रैक तक के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर उस ‘अदृश्य चेहरे’ को बेनकाब किया जाए, जिसने एक बेबस किसान के बुढ़ापे का सहारा छीन लिया।
पुलिस अधीक्षक से सीधी मांग-
इस खूनी पहेली को सुलझाने और एक पीड़ित किसान परिवार को न्याय दिलाने के लिए ‘रायगढ़ टाईम्स’ जिला पुलिस अधीक्षक से त्वरित, उच्चस्तरीय और तकनीकी जांच का पुरजोर निवेदन करता है..


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