रायगढ़ का एकमात्र शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अपने लिए सांसें भी सरकार से उधार मांगकर जीने मजबूर….
रायगढ़। जिस तरह से रायगढ जिले में उद्योगों का विस्तार हुआ, उसके अनुकूल तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना नहीं की गई। एक कॉलेज बना भी तो उसकी हालत बेहद खराब हो गई। किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का हाल बदतर होता जा रहा है। 15 महीनों से यहां के स्टाफ को वेतन तक नहीं मिला है। केआईटी की स्थापना के पीछे उद्देश्य रायगढ़ के युवाओं का भविष्य संवारना था। जो युवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने बाहर नहीं जा सकते, उनके लिए के आईटी को मजबूत विकल्प बनाना था। इतने सालों में केआईटी का सिर्फ दोहन किया गया। जो फंड मिले, उसका दुरुपयोग किया गया।
आज यह संस्थान अपने लिए सांसें भी सरकार से उधार मांगकर जी रहा हैं। कॉलेज के मेंटेनेंस, बिजली बिल आदि का खर्च तो छात्रों की फीस से किया जा रहा है लेकिन फैकल्टी और अन्य स्टाफ का वेतन नहीं निकल पा रहा हैं। छह ब्रांचों में मात्र डेढ़ सौ छात्र छात्राओं ने ही एडमिशन लिया हैं। करीब 15 महीनों से किसी को वेतन ही नहीं मिल सका है। इस वजह से बिना वेतन ही काम करने की मजबूरी है। बहुत से स्टाफ ऐसे हैं, जिन्होंने 10 साल से अधिक समय तक सेवा दी है। अब उनकी उम्र ज्यादा हो चुकी है। उन्हें संस्थान छोड़कर दूसरी नौकरी नहीं मिलेगी। इसलिए मजबूरी में सभी सरकार से उम्मीद बांधे हुए हैं।
डीएमएफ से भरा था पेट
करीब डेढ़-दो साल पहले वेतन की मांग होने पर डेढ़ करोड़ रुपए डीएमएफ से जारी किए गए थे। इससे लंबित वेतन मिल गया था। अब फिर से 15 महीने गुजर चुके हैं। डीएमएफ से भी बार-बार फंड नहीं मिल सकता। पूर्वं में जितना भी फंड कॉलेज को संवारने के लिए जारी किया गया, वह सही तरह से खर्च नहीं किया गया। भ्रष्टाचार के भी कई आरोप लगे हैं।
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