“खेल मैदान पर कब्जे की गूंज पहुंची जनदर्शन तक” बच्चों की सुरक्षा और भविष्य पर मंडराया खतरा, त्वरित निराकरण की मांग तेज…
सारंगढ़। जनदर्शन में एक बार फिर जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा सामने आया है। ग्राम सहसपुर (प०ह०नं० 61) स्थित शासकीय स्कूल परिसर के सामने मौजूद खेल मैदान पर कथित अतिक्रमण और लंबित प्रकरण के निराकरण को लेकर टोकन क्रमांक 2310126000352 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया। आवेदन जिला कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़) के समक्ष देकर तत्काल समाधान की मांग की गई है।
तहसीलदार न्यायालय में लंबित मामला, पूर्व में भी हुआ था आवेदन
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि संबंधित प्रकरण तहसीलदार न्यायालय सारंगढ़ में रा०प्र०क० 2.2.6.523.2030001/ के अंतर्गत विचाराधीन है। इससे पहले 20 फरवरी 2024 को भी आवेदन दिया गया था, जिस पर हल्का पटवारी द्वारा स्थल निरीक्षण कर पंचनामा और सीमांकन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था।
खसरा नंबर 96 की भूमि पर कब्जे का आरोप
पटवारी प्रतिवेदन के अनुसार खसरा नंबर 96, रकबा 0.308 हेक्टेयर भूमि छोटे झाड़ के जंगल एवं स्कूल खेल मैदान के रूप में दर्ज है। प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि उक्त भूमि पर कुछ व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर उपयोग किए जाने की स्थिति सामने आई है।
जर्जर भवन बना जोखिम का कारण
आवेदन में यह भी बताया गया है कि पूर्व सरपंच कार्यकाल (वर्ष 1989) में निर्मित एक पुराना मकान खेल मैदान परिसर में मौजूद है, जो वर्तमान में जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई गई है कि भवन की स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
11 लाख का प्रस्ताव, फिर भी विकास कार्य लंबित
स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल निर्माण तथा मिट्टी-मुरूम से समतलीकरण के लिए कई बार आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है। नगर पालिका परिषद सारंगढ़ के इंजीनियर द्वारा लगभग 11 लाख रुपये का अनुमान भी तैयार किया गया, लेकिन कार्य प्रारंभ नहीं हो सका।
खेल मैदान का विकास नहीं होने से विद्यार्थियों को खेलकूद गतिविधियों और शारीरिक प्रशिक्षण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों और ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ी हुई है।
जनहित में समाधान की मांग
आवेदनकर्ता ने जिला प्रशासन से जनहित को प्राथमिकता देते हुए खेल मैदान से संबंधित समस्या का शीघ्र निराकरण कराने तथा स्कूल परिसर को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने की मांग की है।
जनदर्शन में उठे इस मुद्दे के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक पहल पर टिकी हुई हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक खेल मैदान मिल सके।

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