सावधान! रेबीज है 100% जानलेवा, पर सही समय पर बचाव ही है सुरक्षा कवच…सारंगढ़: राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण..
सारंगढ़। जिले में रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिले के सभी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल के चुनिंदा अधिकारियों व कर्मचारियों को रेबीज प्रबंधन का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
10 माह में सामने आए 8186 मामले
प्रशिक्षण के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जिले में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक (कुल 10 माह) में 8186 एनिमल बाइट (जानवरों के काटने) के केस दर्ज किए गए हैं। राहत की बात यह है कि इन सभी प्रभावितों को समय पर उपचार मुहैया कराया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जो एक बार होने के बाद मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित होता है।
संक्रमण के लक्षण पहचानें और बचें-
प्रशिक्षण में बताया गया कि रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने या खरोचने से फैलता है।
मनुष्यों में लक्षण: पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया), हवा से डरना और व्यवहार में बदलाव।
जानवरों में लक्षण: व्यवहार में अचानक बदलाव, बिना कारण उत्तेजित होना, आवाज बदलना, अत्यधिक लार निकलना और लकवा मार जाना।
क्या करें जब जानवर काट ले? (गोल्डन रूल्स)
विशेषज्ञों ने ‘एनिमल बाइट’ के तुरंत बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपचार पर जोर दिया–
तुरंत सफाई: घाव को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
खुला रखें: घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं लेकिन उसे कभी भी पट्टी से न बांधें और न ही टांके लगवाएं।
टीकाकरण: बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें और एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का कोर्स शुरू करें।
टीकाकरण का सही शेड्यूल-
त्वचा (Intradermal): 0, 3, 7 और 28वें दिन।
मांसपेशी (Intramuscular): 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन।
गंभीर घाव होने पर इम्युनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन भी अनिवार्य है।
अपील-
घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि कुत्ता काटने पर मिर्च, हल्दी या अन्य घरेलू नुस्खों के चक्कर में समय बर्बाद न करें। अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं और मोहल्ले में संदिग्ध जानवरों की सूचना तुरंत नगर पालिका या पंचायत को दें। याद रखें, रेबीज का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव ही एकमात्र समाधान है।
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