बिसालपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने स्पष्ट किया कि बलिदानी जवान की मां को पेंशन से वंचित करना उचित नहीं है।

2002 में नक्सली मुठभेड़ में हुए थे शहीद
मामला जशपुर जिले की 68 वर्षीय फिलिसिता लकड़ा से जुड़ा है। उनके बेटे इग्नेशियस लकड़ा छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स की 10वीं बटालियन में कांस्टेबल थे। 11 दिसंबर 2002 को नक्सली मुठभेड़ में वे बलिदान हो गए थे। इसके बाद उनके पिता लोबिन लकड़ा को फैमिली पेंशन मिलती रही।
मां का आवेदन हुआ था खारिज
23 अगस्त 2020 को पिता के निधन के बाद मां ने पेंशन के लिए आवेदन किया। पुलिस विभाग ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि अविवाहित कर्मचारी की मां को पेंशन देने का नियमों में प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने राज्य शासन को दिए निर्देश
अदालत ने कहा कि यदि पुराने नियमों में मां को पेंशन का प्रावधान था, तो बाद के नियमों की व्याख्या भी उसी भावना से की जानी चाहिए। कोर्ट ने राज्य शासन को छह सप्ताह के भीतर मामले पर पुनर्विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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