प्राइवेट अस्पताल की काली करतूत..स्टोन के ऑपरेशन कराने गये युवक का निकाल लिया किडनी..! अस्पताल प्रबंधन ने करा लिए कोरे कागज में दबावपूर्वक हस्ताक्षर और पीड़ित को दी धमकी…!
मोहाली। मोहाली के डेराबस्सी के एक व्यक्ति की ऑपरेशन के दौरान किडनी निकालने की मामला सामने आया है। पीड़ित ने डेराबस्सी के एक प्राईवेट अस्पताल पर उसकी किडनी निकालने के आरोप लगाया है।
पीड़ित ने प्राइवेट अस्पताल में किडनी में स्टोन निकालने के लिए अस्पताल में ऑपरेशन करवाया था। इस दौरान उसकी एक किडनी निकाल दी गई।
पीड़ित पूरन चंद गांव डेरा जगाधरी डेराबस्सी ने मोहाली में की एक प्रेस कांफ्रेंस कर डेराबस्सी स्थित संजय अस्पताल के मालिक और स्टाफ पर किडनी स्टोन (गुर्दे में पथरी) का ऑपरेशन बताकर उसकी किडनी निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। इतना ही नहीं पीड़ित ने कहा कि उसने संजय अस्पताल के प्रबंधन के खिलाफ एसएसपी मोहाली में शिकायत दी थी जिस पर पुलिस ने अब तक कार्रवाई नहीं की है।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मालिक संजय अत्री व उसके बेटे वरुण अत्री ने साथियों सहित उसके घर में जबरन घुसकर उससे व उसके परिवार के सदस्यों के खाली पेपरों पर हस्ताक्षर करवा लिए और उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने शोर डाला तो उन्हें इससे भी गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
पीड़ित पूरन चंद ने आरोप लगाया कि उसके गुर्दे में पथरी थी। इसकी रिपोर्ट उसके पास थी। वह इलाज के लिए डेराबस्सी स्थित संजय अपना अस्पताल में इलाज के लिए गया था। इस बीच डॉ. संजय ने उसे 2-3 दिन बाद अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा और 26 जुलाई को उसका ऑपरेशन किया गया और 27 जुलाई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अगले दिन वह आपरेशन के जख्म में पट्टी कराने के लिए अस्पताल गया, तो उसके जख्म में पस पड़ गया था। उसने डॉ. संजय को बताया तो उन्होंने कहा कि 1-2 दिनों में यह ठीक हो जाएगा। अगले दिन वह जीरकपुर के जेपी अस्पताल में पट्टी करवाने गए तो वहां से भी उसे दोबारा पट्टी करके तस्सली देकर घर भेज दिया। इसके बाद हालत ज्यादा खराब होने पर परिवार के सदस्य उसे पंचकूला डॉ. राम कुमार के अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन की रिपोर्ट मांगी। संजय अस्पताल से उसे रिपोर्ट नहीं दी गई थी। जब वह रिपोर्ट लेने संजय अस्पताल गया तो वहां उसे रिपोर्ट देने से मना कर दिया गया।
जब पीड़ित के परिवार के सदस्य व गांव के लोग इकट्ठा होकर संजय अस्पताल गए तो एक घंटे बाद उन्होंने उसे रिपोर्ट दे दी। उन्होंने सभी रिपोर्ट डॉ. राम कुमार को दिखाई। इसके बाद उसका अल्ट्रासाउंड किया गया, जिसमें पता चला कि ऑपरेशन के दौरान उसकी एक किडनी निकाल ली गई है। उन्होंने तुरंत थाना डेराबस्सी में शिकायत दी, लेकिन उसे शिकायत देने के लिए एसएसपी दफ्तर भेज दिया गया। 10 अगस्त को उसने एसएसपी को शिकायत दी। लेकिन उसकी शिकायत पर पुलिस ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। उक्त अस्पताल के मालिक संजय अत्री व उसका बेटा वरुण अत्री रात में उसके घर पहुंचे और उसके व उसके परिवार के सदस्यों के खाली पेपर पर हस्ताक्षर ले लिए और उन्हें चुप रहने की धमकी दी।
पीड़ित ने बताया कि अपनी गंभीर बीमारी के कारण वह आज तक आगे कोई कार्रवाई नहीं कर सका। लेकिन अब वह चलने में सक्षम है। पीड़िता ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि उसकी किडनी अस्पताल से वापस दिलाई जाए और अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए क्योंकि उन्होंने उसकी जिंदगी खराब कर दी है।
इस सबंधी जब डॉक्टर संजय अत्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि हमारा मामला हल हो चुका है। एसएसपी ऑफिस में शिकायत हुई थी जहां हमारे बयान दर्ज हो गए थे। अब हमें ब्लैकमेल करने के लिए ऐसे झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
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