छत्तीसगढ़:केजी के छात्र को होमवर्क न करने पर पेड़ से लटकाया, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान…
सूरजपुर। रामानुजनगर में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में केजी-टू के छात्र को होमवर्क पूरा न करने के कारण शिक्षक द्वारा पेड़ से घंटों लटकाने की घटना सामने आई है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पालकों का गुस्सा फूट पड़ा, और बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल के बाहर हंगामा करने पहुंचे। इस मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है और सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग से शपथ पत्र में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 को तय की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ क्रूरता और निजी स्कूलों में अव्यवस्था असहनीय और अस्वीकार्य है। उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग को इस घटना को गंभीरता से लेने और तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
शिक्षा विभाग ने बताया कि घटना के बाद टीचर काजल साहू को बर्खास्त कर दिया गया है और स्कूल की मान्यता समाप्त करने की नोटिस भी जारी की गई है। यह घटना रामानुजनगर ब्लाक मुख्यालय क्षेत्र के नारायणपुर के हंसवानी विद्या मंदिर में हुई। स्कूल में नर्सरी से पांचवीं तक के छात्र पढ़ते हैं। बीते सोमवार को जब स्कूल खुला, बच्चे समय पर पहुंचे। नर्सरी क्लास में पढ़ाई शुरू होने पर शिक्षक काजल साहू ने बच्चों के होमवर्क की जांच की। इस दौरान एक छात्र का होमवर्क अधूरा पाया गया। शिक्षक ने छात्र पर भड़कते हुए उसे कक्षा से बाहर निकालकर पेड़ से रस्सी के सहारे लटका दिया। घंटों तक बच्चा रस्सी के सहारे लटका रहा और रोता रहा। उसने शिक्षक से उसे छोड़ने की भी विनती की, लेकिन शिक्षक ने ध्यान नहीं दिया।
घटना के समय एक ग्रामीण ने वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वायरल वीडियो ने अभिभावकों में गुस्सा भड़काया। बच्चों की सुरक्षा को लेकर पैरेन्ट्स ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल प्रबंधन ने शुरू में घटना को मामूली बताया। लेकिन विरोध बढ़ने और वीडियो वायरल होने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। अधिकारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और मामले में कार्रवाई की जाएगी। घटना ने बाल सुरक्षा और निजी स्कूलों में अनुशासन के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग और कोर्ट की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक की क्रूरता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों में कड़े निर्देश और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बच्चों के साथ कोई भी दुर्व्यवहार न हो। हाईकोर्ट की सुनवाई और शिक्षा विभाग की जांच इस मामले को नैतिक और कानूनी दृष्टि से उदाहरण बनाती है।
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