सारंगढ़। सारंगढ़ से रायपुर जाने वाली नेशनल हाईवे सड़क पर घोघरा नाला पर बना पुल आजादी के समय का पुल है। लगभग 75 वर्ष से अधिक पुराना हो चुका इस पुल को लेकर नेशनल हाईवे प्राधिकरण अभी भी उदासीन रवैया अपनाया हुआ है। जर्जर हो चुके इस पुल पर यातायात का बडा दबाव रहता हे तथा दिन रात वाहनो का रेलमपेल रहता है। भारी वाहनो के साथ साथ यात्री बसो का भी लगातार आवागमन इस पुल पर होता है किन्तु चारदिवारी तक गिर चुकी इस पुल को लेकर एनएचआई गंभीर नही है कभी भी बड़ा हादसा यहा हो सकता है।

सारंगढ़ के नगरीय सीमा में वार्ड क्रमांक 5 मे आने वाला रायपुर रोड़ का घोघरा पुल लोहारिन डबरी तालाब से लेकर पुटका नाला तक सकरे रोड़ में तब्दील हो चुका है। महज चंद फीट चौड़ी इस सड़क पर सारंगढ़ का बड़ा हिस्सा आवागमन करने के लिये निर्भर है। यहा पर चोनीसो घंटे भारी वाहनो का रेलमपेल है ओर सुबह 9 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक टेफिक का काफी दबाव यहा पर रहता है। वन वे आवागमन वाला इस पुल के दोनो तरफ वाहनो की कतार लगाना आम बात है किन्तु जिला बनने के तीन साल बाद भी इस जर्जर पुल की सुध नही लेने से साफ प्रतीत हो रहा है कि एनएचआई इस पुल को लेकर गंभीर नही है। आजादी के पूर्व अर्थात 75 वर्ष से अधिक पुराना इस पुल पर सारंगढ़ रायपुर का आवागमन होता है। इस पुल के जर्जर होने के बाद भी विभाग इस पुल को लेकर आज तक नया पुल की स्वीकृति नही करा पाया है जिसके कारण से बड़ी आबादी इस पुल से गुजरने के लिये विवश है। बताया जा रहा है कि इस पुल पर बनी हुई चारदिवारी गिर चुकी है तथा महज 2 फीट ऊंची चारदिवारी के सहारे यहा पर आवागमन होता है। लगभग 15 मीटर लंबी इस पुल के दोनो ओर के एप्रोच रोड़ लगभग 100 मीटर है तथा पूरी तरह से 5 मीटर चोड़ी सड़क यहा पर उपस्थित है जिससे आवागमन करने वाले यहा पर सर्तक होकर चलते है। इस पुल को नया बनाये जाने की मांग अर्से से हो रही है किन्तु आज तक इस पुल को लेकर कोई विशेष पहल नही किया गया है। शहर के बीचो बीच स्थित इस पुल पर ही राजधानी का आवागमन निर्भर है वही जिला मुख्यालय सारंगढ़ आने के लिये बरमकेला, सरिया ओर डोंगरीपाली क्षेत्रवासियो के लिये यही पुल वाला ही एक मात्र रास्ता है। इसके अलावा सारंगढ़ विकासखड़ के सालर कनकबीरा क्षेत्र और मल्दा क्षेत्र के सेकड़ो गांव के रहवासी भी इस पुल से गुजरकर ही सारंगढ़ आते है किन्तु इस पुल के जीर्णोद्धार को लेकर कभी पहल नही किया गया है। घोघरा नाला के ऊपर बना यह पुल इतनी ऊंचाई पर बना है कि कभी भी बाढ़ में यह पुल डूबेगा नही, किन्तु 75 वर्ष से अधिक समय हो जाने के कारण से इसका सुरक्षित रहने को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। नेशनल हाईवे विभाग ने इस पुल का कभी सुरक्षा आड़िट भी नही किया है। इसके पिल्हर ओर इसके निमार्ण को लेकर कभी भी एडवाईजरी जारी नही किया है जिसके कारण से इस पुल को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है? देशभर में वर्षाकाल में वर्षो पुराने पुल के धसकने आदि का लगातार खबरे आ रही है ऐसे मे इस पुल का भी सुरक्षा मानक जांच अति आवश्यक है।
वन वे ट्रेफिक से चंद फीट चौड़ी पुल पर टिकी है सारंगढ की यातायात व्यवस्था =
सारंगढ़ के इस पुत पर आवागमन करना खतरे से खाली नही है। यहा पर दोनो ओर से वाहन का आवागमन एक साथ नही हो सकता है।इस कारण से कई बार लंबी कतारे लग जाती है। बेहद की संकरी इस पुल पर चारदिवारी भी गिर चुकी है किन्तु नया पुल निमार्ण और प्राक्कलन आदि को लेकर अभी तक एनएचआई गंभीर नही हो पाया है। वन विभाग के कार्यालय से लेकर रेस्ट हाऊस तक की सकरी सड़क पर आवागमन काफी धीमा हो जाता है तथा कछुआ की चाल से रेंगते हुए ट्रेफिक व्यवस्था सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय के बदहाल सड़क और पुल पुलिया की पोल खोल देता है।
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