छत्तीसगढ़: शिक्षकों को बांटना था बच्चों को सूखा राशन, डीईओ ने सौंप दिया एजेंसी को काम.. आपदा को डीईओ ने बनाया अवसर, बच्चों के निवाले पर डाला डाका, शिक्षा मंत्री ने किया सस्पेंड…

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बिलासपुर । कोरोनाकाल में तत्कालीन मुंगेली डीईओ ने करीब एक करोड़ का घोटाला कर दिया, जिसका खुलासा होते ही शिक्षा मंत्री ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है। डीईओ ने बिना टेंडर जारी किए और नियमों को ताक में रखकर 99.95 लाख का सूखा राशन प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए बंटवा दिया।वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र में यह घोटाला उजागर हो सका।

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कोरोनाकाल में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन के लिए सूखा राशन दिया जाना था, जो शिक्षकों और प्रधानपाठकों के जरिए किया जाना था। लेकिन, मुंगेली के तत्कालीन डीईओ जेपी भरद्वाज ने बिना टेंडर के और छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए यह काम कर दिया। इस दौरान 99 लाख 95 हजार की राशन क्रय में अनियमितता बरती गई। तत्कालीन डीईओ ने आपदा को अवसर बनाकर मनमाने तरीके से यह काम किया। चूंकि, कोरोनाकाल में इमरजेंसी में खरीदी करने की छूट मिली हुई थी लेकिन इतनी बड़ी खरीदी में जिन नियमों का पालन किया जाना था, वह नहीं किया गया। उद्योग विभाग से छूट लेनी थी, वह भी नहीं ली गई। इस अनियमितता के खुलासा होते ही शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने तत्कालीन मुंगेली डीईओ जेपी भरद्वाज को सस्पेंड कर दिया है, वर्तमान में वे कोरबा जिले में पदस्थ हैं।

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मंत्री बोले- 36 करोंड़ का डाका कोई छोटा-मोटा काम नहीं

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सदन में शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस घोटाले के बारे में साफ शब्दों में कहा कि, कुछ लोगों ने बच्चों के निवाले पर डाका डालने का काम किया है, 36 करोड़ का यह घोटाला छोटा-मोटा काम नहीं है। इसमें शामिल सभी पर कार्रवाई की जाएगी। इतनी बड़ी खरीदारी में जिन नियमों का पालन करना चाहिए था, वह नहीं किया गया और ना ही इसकी अनुमति ली गई।

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सस्पेंड की घोषणा, आदेश जारी नहीं हुआ, होगी विभागीय जांच

अनियमितता का खुलासा होने के बाद शिक्षा मंत्री ने मुंगेली के तत्कालीन डीईओ जेपी भारद्वाज समेत 5 डीईओ को सस्पेंड करने की घोषणा की है। दूसरी ओर विभाग की माने तो अब तक इसका आदेश विभाग तक नहीं पहुंचा है। साथ ही इस मामले में आगे विभागीय जांच भी होगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई विभाग के द्वारा की जाएगी।

विधायक धरमलाल ने घोटाले को किया उजागर, सदन में जमकर हुई बहस

इस अनियमितता को उजागर बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम के विरुद्ध की गई करोड़ों की खरीदी के बारे में विधानसभा में प्रश्न उठाया था, जिसके बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई। बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी करने के मामले को शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने संज्ञान में लिया, इसके बाद इस मामले में कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए। विधायक धरमलाल कौशिक के इस खुलासे के बाद सदन में जमकर बहस भी हुई।

इन 5 जिले के डीईओ ने किया 36.51 करोंड़ का घोटाला

पूर्व में जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा नियम विरुद्ध खरीदी करने का घोटाला 50 करोड़ के होने की बात कही गई, बाद में शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब तक 5 जिले में इस तरह की खरीदी का मामला सामने आया है। इसमें सूरजपुर जिले में 11 करोड़ 36 लाख, मुंगेली जिले में 99 लाख 95 हजार, बस्तर जिले में 20 करोड़ 47 लाख, बीजापुर में 53 लाख 64 हजार और कोंडागांव जिले में 3 करोड़ 14 लाख के खरीदी घोटाले का खुलासा हुआ है। इन जिलों में रहे तत्कालीन डीईओ को सस्पेंड कर दिया गया है।

शिक्षकों को बांटना था बच्चों को सूखा राशन, डीईओ ने सौंप दिया एजेंसी को काम

यह पूरा मामला स्कूली बच्चों के मध्यान्ह भोजन से जुड़ा हुआ है। असल में कोरोनाकाल में सभी स्कूल बंद थे, लेकिन शासन ने स्कूली बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन वाली व्यवस्था को जारी रखते हुए यह आदेश दिया था कि स्कूली बच्चों को शिक्षकों के माध्यम से सूखा राशन व अन्य सामग्री पहुंचाई जाएगी, इस दौरान कोविड के गाइडलाइन का पालन किया जाए। लेकिन, मुंगेली के तत्कालीन डीईओ जेपी भारद्वाज ने ऐसा नहीं किया और प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए सूखा राशन की खरीदी करवाते हुए उन्ही से यह वितरित करवा दिया। बिना टेंडर के सीधे सामग्री क्रय किया जाना पूरी तरह से नियमविरुद्ध था।

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