सारंगढ़ जिला विरोधी नेताओं को नाप रही जनता…चुनाव जीतना तो दूर,भविष्य में मंच मिलना भी हो सकता है मुश्किल….!

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जगन्नाथ बैरागी की कलम से..

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सारंगढ़। कहते हैं पान, पानी और पालगी कि शहर सारंगढ़ में सभी धर्म, वर्गों का सम्मान बराबर होता है। यहां की जनता इतनी दयालु है कि अपनी रोटी को भी बांट के खाने में विश्वास रखती है।

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दयालुता का जीवित उदाहरण वर्तमान से बेहतर क्या हो सकता है,जब वर्षों से सारंगढ़ वासियों की एक ही प्रमुख मांग सारंगढ़ जिला था जिसे वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ नाम से बनाने की घोषणा की तो सहसा सारंगढ़ की जनता को विश्वास ही नही हुवा क्योंकि सारंगढ़ जिले की मांग तो सिर्फ सारंगढ़ की जनता की थी। लेकिन सारंगढ़ की महानता देखिए अपने नाम मे बिलाईगढ़ जुड़ने पर भी कोई ऐतराज नही रखा।

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वरना चाहते तो सारंगढ़ के स्थानीय नेता और जनता इसका पुरजोर विरोध कर सकते थे। लेकिन कहा जाता है ..”छत्तीसगढ़ गढ़िया सबसे बढ़िया और जम्मो ले बढ़िया सारंगढिया”..अपना नाम तक बाटने वाले सारंगढ़ की बड़प्पन का मोल वही जान सकता है जो सारंगढ़ में पैदा हुआ है।

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राजनीतिक रोटी सेकने बरमकेला के नेताओं का विरोध पड़ेगा पार्टी को भारी-

सारंगढ़ जिला घोषणा होते कुछ दिन ही बीता था कि भाजपा के नेताओं और कुछ कांग्रेसी नेताओं ने बरमकेला को रायगढ़ में यथावत रखने की मांग उठाने के लिए ज्ञापन और रैली का दौर शुरू कर दिया है। शुरुवात हुवी भाजपा नेताओं से जिसमे जगन्नाथ पाणिग्राही, जवाहर नायक प्रमुख थे जिसकी सारंगढ़ की जनता को जरा भी पूर्वानुमान नही था।

क्योंकि इन्ही नेताओं को पहले सारंगढ़ के मंच में सारंगढ़ के स्थानीय नेताओं की अपेक्षा ज्यादा मंच और सम्मान देते आये थे। जगन्नाथ पाणिग्राही तो मानो सारंगढ़ के नेता ही माने जाते थे लेकिन दुख की बात तो ये है कि विरोध भी इन्ही के द्वारा किया गया..!

भाजपा नेताओं के विरोध से पार्टी को होगी चुनाव में नुकसान..!

15 साल राज करके भी सारंगढ़ को छलावा करने वाली भाजपा सारंगढ़ को एक अदद जिला तक घोषणा नही करवा पायी, कहीं इसके पीछे ऐसे ही भाजपा नेताओं का हाथ तो नही था जो कि हमेशा अंदर ही अंदर चाहते थे कि सारंगढ़ कभी जिला नही बने, ऐसा अब तो जनता भी सोचने लगी है। क्योंकि जैसे ही कांग्रेस विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े के प्रयास से मुख्यमंत्री ने जिला की घोषणा की मानो सांप के पूंछ में पैर रख दिया हो।

कुछ लोग सारंगढ़ जिला विरोध पर उतर आये और तर्क यह रखा कि बिलाईगढ़ में भी सरकारी मुख्यालय होगा जो कि रायगढ़ से दूर पड़ेगा। अगर मुख्यालय से दूरी ही कारण होती तो ज्ञापन रैली इस बात की निकालते के सभी मुख्यालय सारंगढ़ में हो, तो शायद जनता इन्हें सर-आंखों पर बैठा कर दुगुना प्यार देती। लेकिन जिस तरह सारंगढ़ सीमा से लगे बरमकेला के नेता अपनी राजनीतिक रोटी सेकने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए विरोध कर रहे हैं, ये चाल उनपर भविष्य में भारी पड़ेगी इससे इनकार नही किया जा सकता, और विरोधी नेताओं को पार्टी संगठन में भविष्य में सारंगढ़ में उच्चपद पार्टी को फायदे की अपेक्षा नुकसान ही पहुंचाएगी।

सारंगढ़ जिले से कांग्रेस को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ इसलिए बेवजह विरोध…!

15 साल तक भाजपा ने छत्तीसगढ़ पर राज किया इन 15 वर्षों में दर्जनों बार पूर्व मुख्यमंत्री सारंगढ़ आये सभी ने एक स्वर में एक ही मांग की सारंगढ़ जिला.. इसलिए सारंगढ़ में कभी कोई विधायक रिपीट ही नही हुवे क्योंकि जो विधायक सारंगढ़ को जिला नही बना सकता वो कभी सारंगढ़ वासियीं के दिल मे दुबारा नही बैठ सकता।
भाजपा शासन में 15 साल से आश्वासन का झुनझुना पकड़ा बेवफ़ाई का घूँट पी सारंगढ़ वासी तो अबकी बार भी उम्मीद खो दिए थे कि सारंगढ़ जिला बन भी पाएगा या नही।

ऐसे में अचानक जिला घोषणा से सभी को मानो सूखे पड़े खेत मे पानी की धार पड़ती दिखाई दी और जिला बनने पर आगामी चुनाव में जनता का झुकाव कांग्रेस की तरफ होगी इससे इनकार नही किया जा सकता।

विद्रोही नेताओ से भाजपा जिलाध्यक्ष को रहना होगा सावधान, देनी होगी समझाईश..

सारंगढ़ जिला बनेगा अब इससे कोई मुकर नही सकता। सत्ता कांग्रेस के पास है और गाहे-बगाहे विरोध का भी राजनैतिक रणभूमि में कोई औचित्य नही है इस बात को भाजपा जिलाध्यक्ष बखूबी समझते हैं। लेकिन खेल हो या राजनीति कुछ स्थायी नही रहता।

भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल हमेशा सारंगढ़ जिला के पक्ष में रहे हैं, और उन्होंने हमेशा सारंगढ़ जिला की मांग मुखरता से उठाई है। लेकिन अब उन्हें सारंगढ़ की जनता को यकीन दिलाना होगा कि वो सारंगढ़ के जनता के हर दुख और खुशी में साथ हैं। क्योंकि उनके कुछ नेताओं के खातिर सारंगढ़ की जनता में नाराज़गी उबाल मार रही है,समय रहते इस आग को बंद नही की गई तो पानी का पतीले से निकलना तय है। अगर भाजपा नेताओं पर रोष बढ़ता गया तो आगामी कई चुनाव तक भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।

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