रायगढ़, । राजीव गांधी किसान न्याय योजना में बहुत बड़ा घपला सामने आया है। ऐसे किसानों का पंजीयन कर दिया गया जिनका बैंक एकाउंट ही नहीं है। भुगतान करने पर ऐसे किसानों को ट्रांजेक्शन फेल हो गया। तब पता चला कि जो एकाउंट नंबर समिति में पंजीयन के दौरान डाला गया है, वह तो है ही नहीं। कई किसानों के एकाउंट बंद पाए गए। संचालक के आदेश पर सबका वेरीफिकेशन करने का आदेश दिया गया है।

धान खरीदी में सालों से बड़े-बड़े घोटाले होते रहे हैं। किसानों के नाम से फर्जी बैंक एकाउंट नंबर डालकर पंजीयन कर देना और बाद में भुगतान के समय एकाउंट नंबर बदल देना बेहद आसान है। यह सब सरकारी सिस्टम की सहमति से होता है। सहकारी समितियां घपले का प्रमुख साधन बन गई हैं। अब इसका भांडा फूटा है। प्रदेश में करीब 17559 किसानों को ऑनलाइन भुगतान फेल हो गया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रति एकड़ करीब नौ हजार रुपए धान बेचने वाले किसानों को मिलते हैं। खरीफ 2022 के फसल की पहली किश्त जब जारी की गई तो 17559 किसानों तक राशि पहुंची ही नहीं।
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल हो गए। रायगढ़ जिले में 659 और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 368 किसानों की सूची सामने आई है। जब पड़ताल की गई तो पता चला कि इन किसानों में से 70 प्रश के तो बैंक एकाउंट ही उस बैंक में नहीं मिले। वहीं 30 प्रश किसान ऐसे थे जिनका एकाउंट बंद हो गया था। अब पूरा मामला किसान पंजीयन पर आकर ठहरता है। पंजीयन के दौरान समितियों में कंप्यूटर ऑपरेटर ही किसानों के बैंक एकाउंट डालते हैं। इसलिए पूरा घपला वहीं से शुरू हुआ।
कहीं किसान भी गायब तो नहीं?
दरअसल ऐसा हर साल होता है। समितियों में किसान पंजीयन के दौरान एकाउंट नंबर गलत डाला जाता है। भुगतान के समय इसे बदलकर दूसरे का एकाउंट नंबर डाला जाता है। इस बार संभवत: ऐसा नहीं हो सका होगा क्योंकि पोर्टल में कुछ संशोधन किए गए थे। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि किसानों का नाम भी फर्जी हो सकता है। मतलब गलत नाम और जमीन की गलत जानकारी डालकर पंजीयन करवा लिया गया। अब संचालक रानू साहू के आदेश पर कृषि विभाग ने खाता सत्यापन प्रारंभ किया है।
तहसील किसान
लैलूंगा 153
धरमजयगढ़ 127
छाल 26
घरघोड़ा 89
खरसिया 50
पुसौर 88
रायगढ़ 57
तमनार 68

