बॉलीवुड की सबसे चुलबुली, बेबाक और अपने हर किरदार से पर्दे पर लोगों का दिल जीत लेने वाली वर्सटाइल एक्ट्रेस काजोल का आज (5 अगस्त) 52वां जन्मदिन है. 90 के दशक से लेकर आज तक काजोल ने पर्दे पर जब-जब कदम रखा, दर्शकों के दिलों की धड़कनें तेज कर दीं.

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की सिमरन हो या ‘कुछ कुछ होता है’ की अंजली, काजोल के रोमांटिक और इमोशनल अंदाज पर तो पूरी दुनिया फिदा है. लेकिन उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए आपको बताते हैं उनके करियर के उस सबसे बड़े और खौफनाक किरदार के बारे में, जिसके जरिए उन्होंने सभी को दंग कर दिया था.
क्या आप जानते हैं कि काजोल के पूरे करियर का सबसे मुश्किल रोल कोई रोमांटिक या फैमिली ड्रामा नहीं, बल्कि एक साइको-लवर का किरदार था? जी हां, साल 1997 में आई निर्देशक राजीव राय की ब्लॉकबस्टर सस्पेंस थ्रिलर ‘गुप्त: द हिडन ट्रुथ’ में काजोल ने ईशा दीवान का ऐसा रोल निभाया था, जिसने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक कभी न टूटने वाला रिकॉर्ड दर्ज करा दिया था.
जब काजोल ने जीता ‘बेस्ट विलेन’ का अवॉर्ड
90 के दशक में किसी भी टॉप हीरोइन के लिए पर्दे पर ‘ग्रे’ या ‘निगेटिव’ शेड चुनना बहुत बड़ा रिस्क माना जाता था. माना जाता था कि अगर हीरोइन विलेन बन गई तो उसकी मासूम इमेज खत्म हो जाएगी. लेकिन काजोल ने इस सोच को पूरी तरह से खारिज कर दिया था. उन्होंने ‘गुप्त’ में एक ऐसी सनकी और कातिल प्रेमिका का किरदार निभाया, जिसे देखकर थिएटर्स में सन्नाटा छा गया था. इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर फॉर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए नेगेटिव रोल के अवॉर्ड से नवाजा गया था. काजोल ये अवॉर्ड जीतने वाली भारतीय सिनेमा के इतिहास की पहली फीमेल एक्ट्रेस बनी थीं.
काजोल के करियर का सबसे मुश्किल रोल
काजोल ने अपने कई इंटरव्यूज में इस बात का जिक्र किया है कि ‘गुप्त’ की ईशा बनना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था. एक तरफ साहिल (बॉबी दओल) के लिए प्यार और दूसरी तरफ उस प्यार के रास्ते में आने वाले हर शख्स का खून कर देने की सनक, इन दोनों इमोशंस को एक साथ चेहरे पर लाना बहुत मुश्किल था. पर्दे पर जहां वे गानों में मासूम लग रही थीं, वहीं बैकग्राउंड में उनका दिमाग मर्डर की प्लानिंग कर रहा होता था.
क्लाइमैक्स का वो सीन और रोंगटे खड़े कर देने वाली आंखें
फिल्म का क्लाइमैक्स आज भी बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन सस्पेंस सीन्स में शामिल है. जब मनीषा कोइराला (शीतल) पर हमला करने के बाद काजोल का सच सामने आता है और वे हाथ में चाकू थामे अपनी खौफनाक मुस्कान के साथ सामने आती हैं, तो दर्शक अपनी सीटों से उछल पड़े थे. उस सीन में काजोल का चिल्लाना, हंसना और आंखों का पागलपन ऐसा था कि सेट पर मौजूद क्रू मेंबर्स भी एक पल के लिए सहम गए थे.
‘माउथ पब्लिसिटी’ से थिएटर्स में मचाया था गदर
1997 का वो दौर सोशल मीडिया और लाइक्स का दौर नहीं था. ‘गुप्त’ को देखने के लिए थिएटर्स के बाहर एडवांस बुकिंग की लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं. जिन दर्शकों ने पहला शो देख लिया, उन्होंने भी सस्पेंस को अपने तक ही सीमित रखा, ताकि बाकी लोग थिएटर्स में जाकर सरप्राइज हो सकें. काजोल के इस रोल की सफलता के बाद ही बॉलीवुड मेकर्स को ये समझ आया कि हमारी हीरोइनें सिर्फ रोने-धोने या नाचने के लिए ही नहीं है, बल्कि वे पूरे सिनेमा को अपने दम पर हिलाने का माद्दा रखती हैं.
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