जगन्नाथ बैरागी

रायपुर। विधानसभा में मानसून सत्र के आखिरी दिन भाजपा सदस्य की ओर से एक अशासकीय संकल्प लाया गया। यह एक जनवरी 2022 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी का संकल्प था। इसे सत्ता पक्ष का समर्थन नहीं मिला। ऐसे में संकल्प खारिज हो गया। संकल्प पारित करने के लिए मत विभाजन की बात आई। शराबबंदी के समर्थन में 13 और विरोध में 58 मत पड़े। विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में नाकाम रही,लेकिन सोशल मीडिया में तेजी से खबर वायरल हो गया कि अगले साल की पहली तारीख से शराब बंदी हो रही है,आधी-अधूरी और बनावटी खबर पढ़कर सूबे के लोग भी चकमा खा गए। मीडिया से लेकर प्रशासन तक लोगों के फोन आते जाते रहे क्या खबर सही हैं। खबर तो सही थी ही नहीं,लेकिन लोग परेशान होते रहे। आखिर इतना बड़ा फैसला एकाएक तो होना नहीं हैं और न ही सरकार की ओर से कोई पुष्टि की गई थी। सदन के भीतर मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि मणिपुर, केरल, तमिलनाडु में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी, लेकिन सफल नहीं हुई। कोरोना के वक्त स्प्रिट पीकर कई लोगों की मौत हो गई। राज्य सरकार ने तीन समितियां गठित की हैं। पूर्ण शराबबंदी के लिए अध्ययन किया जा रहा है। यही हकीकत है। जबकि शराबबंदी की खबर पूरी तरह से भ्रामक है।




