रायगढ़: डेंगू के लक्षण एवं बचाव के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जारी की गाईड लाईन… एलिजा जांच की सुविधा माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट मेडिकल कालेज में उपलब्ध….

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रायगढ़, पिछले कई दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश के कारण जगह-जगह मानव निर्मित कंटेनरों व छतों में कई जगह जलभराव की स्थिति निर्मित हुई है। इसके अलावा 7 दिनों से अधिक जमा अनुपयोगी या रूके पानी में डेंगू बुखार फैलाने वाले एडिस के मच्छर पैदा हो रहे है। शहर के डेंगू लार्वा सर्वे टीम को ज्यादातर पुराने टायर, सीमेंट की टंकी, आंगन में रखी टंकी में जमा पानी पर डेंगू के लार्वा पाए गए है। जिन्हें टीम के सदस्यों द्वारा लार्वा विनिष्टीकरण कर नागरिकों को समझाईश देकर खाली करवाया गया। बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू की दृष्टि से आने वाले 15-20 दिन बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। पिछले एक सप्ताह में 8 डेंगू के नए केस सामने आये है। जिनका किसी भी प्रकार का कोई माइग्रेशन हिस्ट्री नहीं है।

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने बताया कि रायगढ़ जिले में इस वर्ष 18 डेंगू केस पाए जा चुके है, जिसमे से 12 स्थानीय 6 इम्पोर्टेड केस है। 7 केस रायगढ़ शहरी, 5 केस बरमकेला, 2 केस लोइंग, 1 केस पुसौर एवं 1 केस विजयनगर के है 13 मरीज जिले के विभिन्न हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे, जिसमें से 6 मरीजों को गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स की जरुरत पड़ी है। भारत शासन के निर्देश के अनुसार डेंगू संक्रमित मरीज उसी को माना जाये जिसकी जांच रिपोर्ट इलिजा टेस्ट में भी पॉजिटिव आये रायगढ़ जिले में इलिजा जाँच की सुविधा माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में उपलब्ध है। कार्ड टेस्ट के आधार पर कई बार मरीजों को डेंगू बता दिया जाता है, जिससे मरीज भयभीत हो जाते है जबकि जिले में अबतक 895 डेंगू के लक्षण वाले मरीजों का जाँच किया जा चुका है जिसमे कार्ड टेस्ट से 78 पॉजिटिव पाए गए मगर जब उन सभी का एलिजा टेस्ट करवाया गया तो केवल 38 मरीज ही कन्फर्म हुए है 40 मरीजों का एलिजा रिपोर्ट नेगेटिव प्राप्त हुआ है। इन मरीजों में कई जिले से बाहर के हैं तो कई अन्य राज्य से हैं, जिनकी सूचना संबंधित जिले व राज्य शासन को जिले से दी जा चुकी हैं। अत: रिपोर्ट को डेंगू कन्फर्म रिपोर्ट माना जाता हैं कार्ड टेस्ट केवल डेंगू के संभावित मरीजों को दर्शाता है, जिनका कार्ड टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है उन्ही मरीजों का एलिजा जांच किया जाता है।

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रायगढ जिले में मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, समस्त सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र, समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सभी अर्बन प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्रों में डेंगू संभावित मरीजों की जांच की व्यवस्था नि:शुल्क उपलब्ध है। शहरी क्षेत्र में 129 टीम अन्तविभागीय समन्वय से लार्वा सर्वे कर सोर्स रिडक्शन किया जा रहा है। जिले के स्कूली बच्चे भी जनजागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे।

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डेंगू होने पर अगर सही समय पर इलाज न कराया जाए तो मरीज की जान जा सकती है। कुछ लोग बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह के बिना दवाईयां लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन डेंगू होने पर ऐसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है और प्लेटलेट काउंट तेजी से घट सकता है। प्लेटलेट कम होने पर इंटरनल ब्लीडिंग समेत कई खतरे पैदा हो जाते है। संक्रमित मच्छर काटने के 4 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। डेंगू होने पर प्लेटलेट काउंट तेजी से गिरने लगता है। लक्षण दिखने पर लोगों को तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना घर पर ट्रीटमेंट करना जानलेवा साबित हो सकता है। एक संक्रमित व्यक्ति सीधे संपर्क से अन्य व्यक्तियों में संक्रमण नहीं फैला सकता है, लेकिन लगभग 6 दिनों तक मच्छरों के लिए डेंगू वायरस का स्त्रोत हो सकता है। स्वस्थ लोगों में प्लेटलेट काउंट 15 लाख से 4 लाख के बीच होता है डेंगू होने पर प्लेटलेट तेजी से कम होते हैं और कई बार कंडीशन सीरियस हो जाती है। प्लेटलेट कम होने से इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा होता है। प्लेटलेट कम होने पर ब्रेन समेत शरीर के कई हिस्सों में इंटरनल ब्लीडिंग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा प्लेटलेट्स घटने से लिवर पर बुरा असर पड़ता है। गलत दवाइयों का सेवन करने से लिवर की परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है। डॉक्टर इलाज में हेल्दी प्लेटलेट्स की संख्या ही बढ़ाते हैं। डेंगू में पैरासिटामोल का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसमें एंटीबायोटिक दवा भी नहीं लेनी चाहिए। इससे भी प्लेटलेट काउंट कम होने का खतरा बढ़ जाता है। इन दवाओं से लिवर डिसऑर्डर भी हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बाद ही कुछ दवाइयों को ले सकते हैं। एक मच्छर ही काफी है तबियत बिगाडऩे के लिए। डेंगू बुखार एडीज मच्छरों के काटने से होता है। डेंगू के मच्छर ज्यादातर दिन के समय में काटते हैं। जरूरी नहीं है कि अधिक मच्छर काटे, तब ही डेंगू हो.. एक इन्फेक्टेड मच्छर भी आपको डेंगू दे सकता है।

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इसी इन्फेक्टेड मच्छर के काटने से लक्षण नजर आने में 4 से 10 दिन लग जाते हैं। इसे ही इनक्यूबेशन पीरियड कहा जाता है। डेंगू इन्फेक्टेड होने पर तेज बुखार चढ़ता है। डेंगू से बचाव का करें इंतजाम डेंगू से बचाव का सबसे बढिय़ा तरीका है मच्छरों को अपने पास फटकने न देना। इसके लिए पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहनें। डेंगू के मच्छर आम तौर पर रुके हुए और साफ पानी में लार्वा पैदा करते हैं, इसलिए मच्छरों को बढऩे से रोकने के लिए पानी इकट्ठा न होने दें। सप्ताह में कम से कम एक बार खाली कटेनर, कूलर का पानी निकालकर साफ करें।

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