बरमकेला। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित रुद्र महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा का समापन सोमवार को भक्ति, श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। समापन अवसर पर पंडित योगेश सतपथी एवं उनकी टीम ने रुद्राभिषेक कराने वाले सभी यजमानों का विधिवत हवन-पूजन कराया। इसके बाद शिव मंदिर स्थित लाल तालाब तट पर भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया गया, जिसने पूरे नगर को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया।
गंगा महाआरती महोत्सव-2026 में सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े, आयोजन समिति के रतन शर्मा, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यभामा नायक, विधायक प्रतिनिधि मनोहर नायक सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार बरमकेला में पहली बार इतने विशाल स्तर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
लाल तालाब तट पर आयोजित महाआरती में मातृशक्ति सहित हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रायगढ़, पुसौर, सारंगढ़, सरिया, उड़ीसा के संबलपुर और बरगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक आयोजन के साक्षी बने। चंद्रपुर से आए महाराज एवं पं. योगेश सतपथी के सान्निध्य में मंत्रोच्चार, शंखनाद और विशाल दीपों की आरती ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आयोजन समिति के रतन शर्मा ने कहा कि शिव मंदिर का लाल तालाब क्षेत्र की अमूल्य धरोहर और जीवनदायिनी विरासत है। यह केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी ऋषि परंपरा, संस्कृति और आस्था का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने का आह्वान किया।
विधायक उत्तरी जांगड़े ने अपने संबोधन में कहा कि तालाब किसी भी सभ्यता और संस्कृति की जीवंत पहचान होते हैं। भारतीय परंपरा में तालाबों को जीवनदायिनी माना गया है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में अपनी धरोहरों के संरक्षण का भाव जागृत करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर महावीर अग्रवाल, सुनील शर्मा, नवीन इजरदार, मोहन नायक, मुकेश अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, रामेश्वर बारीक, ताराचंद पटेल, किशोर पटेल, बी.डी. मिश्रा, सोनू गोयल, बाबूलाल (आरके डीजे), गोविंद बैरेट, राजू नायक, आचार्य योगेश सतपथी, शोभा दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नगरवासी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन ने बरमकेला को भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनुपम संदेश दिया।


