बस इतना याद रहे एक साथी और भी था..13 jak rifles-के अजेय योद्धा शहीद विक्रम बत्रा के शहादत को कोटि-कोटि नमन…
नितिन सिन्हा
भारत देश पर आज़ादी के बाद 5 बड़े विदेशी हमले हुए,इन सभी युद्धों में से एक वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध है…इस हमले में पाकिस्तान के करीब 5000 सैनिकों और 2000 आतंकियों ने हमारे देश की सीमाएं लांघ कर भारतीय सीमा में जबरदस्त घुसपैठ की थी….
तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप यह चुनौती बहुत बड़ी थी,जिसका सार्थक जवाब भी हमारी सेना ने दिया था। जवाब भी ऐसा की ऐतिहासिक जीत के बाद दुनिया में भारतीय सेना की युद्ध क्षमता का डंका बजने लगा था।। परन्तु यह भी उतना ही बड़ा सच है कि,इस सफलता(विजय)को प्राप्त करने के लिए हमारी सेना ने भी बड़ी कुर्बानियां दी थी। हमने *करीब 400 जांबाजों की शहादत* के बाद ही हमारी सेना ने जीत का लक्ष्य प्राप्त किया था..
कारगिल के इन सभी शहीदों को भूल पाना आज भी सम्भव नही है.कारगिल युद्ध के शहीद जांबाजो में एक नाम देश के *परमवीर योद्धा जिन्हें कारगिल युद्ध में शेरशाह के नाम से जाना जाता था। अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा* को सैनिक और अधिकारी यहां तक कि दुश्मन देश की सेना भी शेरशाह के नाम से पुकारती थी। कारगिल युद्ध मे प्रदर्शित आपके अदम्य साहस और सर्वोच्च समर्पण भाव के विषय में लिखने के लिए सम्भवतः देश के बड़े से बड़े कलमकारों के लिए भी शब्दों को कमी हो जाएगी..
आज ही के दिन दिनांक *7/जुलाई/1999 को कारगिल युद्ध* में प्वाइंट 4875 की महत्वपूर्ण लड़ाई में जीत के दौरान आपकी शहादत हुई थी.आपने अपना बलिदान देने के चंद सेकेंड पहले भी अपनी पसन्दीदा मोटीवेशनल लाइन दोहराई थी *ये दिल मांगे मोर*।। इस लाइन को आप कारगिल युद्ध मे एक के बाद एक दर्ज की गई जीत के दौरान अक्सर अपने उच्च अधिकारियों और युद्ध मे जाने के पूर्व अपने अधीन सैनिक जवानो के सामने जरूर बोलते थे।।
किसी ने आपके विषय मे लिखते हुए कहा भी है.. कि जवान तो हर देश में लाखो-करोड़ो लोग होते हैं,पर उनमे से शायद ही कोई एक ऐसी जवानी कारगिल हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा उर्फ शेरशाह जैसी होती है।
आपकी शहादत को हमारा कोटि-कोटि नमन..
कैप्टन विक्रम बत्रा अमर रहें…
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