जैसा कि हम सब जानते हैं कि कैंसर एक वैश्विक बीमरी बनती जा रही हैं, जो भारत में तेजी से फैलती जा रही हैं, हर साल लाखों लोगों में इस बीमारी के अलग-अलग प्रकारों का पता चलता है।

खराब खान-पान, तंबाकू का सेवन, प्रदूषण और सुस्त जीवनशैली इस बढ़ोतरी में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें मामूली स्वास्थ्य समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और डॉक्टर से सलाह लेने में देरी करते हैं। आइए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में-
- मल त्यागने या पेशाब करने की आदतों में लगातार बदलाव
लंबे समय तक कब्ज़, दस्त, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय दर्द या मल त्यागने की आदतों में साफ़ बदलाव को हमेशा खान-पान या संक्रमण का कारण नहीं मानना चाहिए।
- घाव या मुंह के छाले जो ठीक न हों
त्वचा पर घाव, मुंह के छाले या कोई भी ऐसा घाव जो कई हफ़्तों के बाद भी ठीक नहीं हो रहा हो, उसके लिए डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। ऐसे लक्षण त्वचा या मुंह के कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।
- बिना वजह ब्लीडिंग या असामान्य डिस्चार्ज
खांसते समय खून आना, मल या पेशाब में खून आना, असामान्य वेजाइनल ब्लीडिंग या असामान्य डिस्चार्ज को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो डॉक्टर से तुरंत जांच करवानी चाहिए।
- शरीर में कहीं भी नई गांठ या सूजन
ब्रेस्ट, गर्दन, अंडकोष, बगल या शरीर के किसी भी अन्य हिस्से में गांठ या उभार होने पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। कैंसर वाली कई गांठें शुरुआती स्टेज में दर्द रहित होती हैं, इसलिए दर्द न होने का मतलब यह नहीं है कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है।
- बार-बार अपच या निगलने में कठिनाई
बार-बार अपच, लगातार एसिडिटी, खाना निगलने में कठिनाई, या बहुत कम खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना-ये लक्षण कभी-कभी सामान्य पाचन समस्याओं के बजाय पेट या एसोफैगस (अन्नप्रणाली) के कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।
- लगातार खांसी या गले में खराश/आवाज बैठना
कई हफ्तों तक रहने वाली खांसी, गले में लगातार जलन या खराश, या आवाज में बिना किसी स्पष्ट कारण के बदलाव होने पर जांच करवानी चाहिए। ये लक्षण फेफड़ों, गले या थायरॉयड के कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।
- असामान्य बदलाव जो बने रहते हैं
शरीर में कोई भी ऐसा असामान्य बदलाव जिसका कोई स्पष्ट कारण न हो और जो कई हफ्तों तक बना रहे-जैसे बिना वजह वजन कम होना, लंबे समय तक थकान महसूस होना, या लगातार दर्द रहना-उसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से इस बारे में बात करनी चाहिए।
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