किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है। शरीर में मौजूद खून को फिल्टर करने, अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के साथ-साथ किडनी शरीर में पानी, नमक और कई जरूरी खनिजों का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके अलावा किडनी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं में भी योगदान देती है।
यही वजह है कि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर के कई हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है। लेकिन किडनी से जुड़ी बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। जब तक समस्या गंभीर रूप नहीं लेती, तब तक व्यक्ति इसे सामान्य थकान या रोजमर्रा की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर सकता है।
हालांकि, शरीर में कुछ ऐसे बदलाव जरूर हो सकते हैं जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैरों में सूजन से लेकर पेशाब में बदलाव और लगातार कमजोरी तक, ये संकेत कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए इन्हें देखकर खुद से किडनी की बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से उचित जांच और सलाह लेना जरूरी है।
- पैरों, टखनों और चेहरे पर बार-बार सूजन
अगर पैरों, टखनों, हाथों या आंखों के आसपास बार-बार सूजन दिखाई देती है, तो इसे सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालने में मदद करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इससे खासकर पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है।
कुछ लोगों में सुबह के समय आंखों के आसपास भी सूजन नजर आ सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि शरीर में सूजन का कारण केवल किडनी की बीमारी नहीं होती। हृदय, लिवर, नसों की समस्या, कुछ दवाएं या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए अगर सूजन बार-बार हो रही है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
- पेशाब में बदलाव को न करें नजरअंदाज
किडनी की सेहत और पेशाब के बीच गहरा संबंध है। इसलिए पेशाब की आदत या उसके स्वरूप में लगातार होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
अगर पेशाब की मात्रा में असामान्य बदलाव दिखाई दे, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़े, पेशाब में लगातार झाग दिखाई दे या पेशाब में खून नजर आए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
पेशाब में कभी-कभी झाग दिखाई देना अपने आप में किडनी की बीमारी का प्रमाण नहीं है। लेकिन अगर झाग लगातार दिखाई देता है, तो पेशाब में प्रोटीन की जांच की आवश्यकता हो सकती है।
इसी तरह पेशाब में खून आने के कई कारण हो सकते हैं। यह हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
- पर्याप्त आराम के बाद भी लगातार थकान
अगर रात में पर्याप्त नींद लेने और आराम करने के बावजूद लगातार थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
किडनी की पुरानी बीमारी बढ़ने पर कुछ लोगों में एनीमिया यानी खून की कमी हो सकती है। इसके कारण शरीर में कमजोरी, थकान, चक्कर, सांस फूलना या एकाग्रता में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
हालांकि, लगातार थकान केवल किडनी की बीमारी के कारण नहीं होती। नींद की कमी, तनाव, पोषण की कमी, एनीमिया, थायरॉयड और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं।
इसलिए अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के लंबे समय तक कमजोरी बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है।
- भूख कम लगना, जी मिचलाना या उल्टी
किडनी की कार्यक्षमता काफी प्रभावित होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को भूख कम लगने, जी मिचलाने, उल्टी होने या मुंह में अजीब स्वाद महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
खाने की इच्छा कम होना अगर लंबे समय तक बना रहे और इसके साथ वजन कम होना, अत्यधिक कमजोरी या अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हालांकि, मतली और उल्टी बेहद सामान्य लक्षण हैं और इनके पीछे पेट की बीमारी, संक्रमण, भोजन से जुड़ी समस्या, दवाओं के दुष्प्रभाव या अन्य कारण भी हो सकते हैं।
इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी का अनुमान लगाना सही नहीं है। लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
- बिना वजह सांस फूलना और नींद में परेशानी
सीढ़ियां चढ़ने या ज्यादा मेहनत करने पर सांस फूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन बिना स्पष्ट कारण के सांस फूलना गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने से कभी-कभी फेफड़ों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा एनीमिया भी सांस फूलने में योगदान दे सकता है।
कुछ लोगों को रात में बेचैनी, पैरों में असहजता या नींद से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। लेकिन इनके कई अन्य कारण भी संभव हैं।
अगर सांस लेने में अचानक परेशानी हो रही है, सांस बहुत ज्यादा फूल रही है या इसके साथ सीने में दर्द, चक्कर या बेहोशी जैसी समस्या हो रही है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
किडनी की जांच कब करानी चाहिए?
किडनी की बीमारी को केवल लक्षणों से पहचानना हमेशा संभव नहीं होता। कई मामलों में शुरुआती किडनी रोग बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकता है।
ऐसे में कुछ लोगों के लिए नियमित जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किडनी की बीमारी का पारिवारिक इतिहास है, उन्हें अपने डॉक्टर से किडनी की जांच की आवश्यकता और अंतराल के बारे में बात करनी चाहिए।
डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और जोखिम कारकों के आधार पर जांच की सलाह दे सकते हैं।
कौन-कौन सी जांच हो सकती है जरूरी?
किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार अलग-अलग जांच करा सकते हैं।
सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर
खून में क्रिएटिनिन का स्तर किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में मदद करता है। इसी से संबंधित ईजीएफआर का इस्तेमाल किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात
यूएसीआर यानी यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात पेशाब में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करता है। पेशाब में लगातार अधिक एल्ब्यूमिन किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
यूरिन टेस्ट
सामान्य पेशाब जांच के जरिए पेशाब में खून, प्रोटीन और अन्य असामान्य बदलावों की जानकारी मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य जांच भी लिख सकते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल एक लक्षण या एक टेस्ट के आधार पर हर व्यक्ति में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। डॉक्टर को पूरी मेडिकल स्थिति देखकर आगे की जांच और उपचार तय करना होता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा परिवार में किडनी रोग का इतिहास, हृदय रोग और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच से किसी समस्या का पता शुरुआती चरण में लगाने और उचित चिकित्सा योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
अचानक पेशाब कम हो तो क्या करें?
अगर पेशाब की मात्रा अचानक बहुत कम हो जाए, शरीर में तेजी से सूजन बढ़ने लगे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो या तबीयत तेजी से बिगड़ रही हो, तो इंतजार नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। खुद से कोई दवा लेना या केवल घरेलू उपायों के भरोसे रहना उचित नहीं है।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
किडनी की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम अपने स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रित रखना है। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन करना, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करना और धूम्रपान से बचना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
दर्द निवारक दवाओं या किसी अन्य दवा का लंबे समय तक इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना भी सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन पानी की मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। जिन लोगों को पहले से किडनी, हृदय या अन्य बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा के बारे में अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।
सबसे जरूरी बात: लक्षण दिखें तो घबराएं नहीं, जांच कराएं
किडनी की बीमारी से जुड़े लक्षण कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए पैरों में सूजन, पेशाब में बदलाव, थकान, भूख कम लगना या सांस फूलना दिखाई देने पर तुरंत यह मान लेना कि किडनी खराब हो रही है, सही नहीं होगा।
लेकिन इन संकेतों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है।
किडनी की कई बीमारियां शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं। इसलिए जिन लोगों में जोखिम अधिक है, उनके लिए नियमित जांच और डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। ऊपर बताए गए लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं और केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता। किसी भी लगातार, गंभीर या अचानक बढ़ती समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत चिकितकीय सलाह और आवश्यक जांच कराएं।
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