सारंगढ़। बरमकेला विकासखंड के ग्राम संडा निवासी कृषक ध्रुवकुमार के जीवन में टसर रेशम उत्पादन आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। कभी कृषि और मजदूरी पर निर्भर रहने वाले ध्रुवकुमार आज टसर कृमिपालन को अपनी आजीविका का मजबूत साधन बनाकर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
ध्रुवकुमार ने रेशम विभाग के मार्गदर्शन में टसर कृमिपालन को अपनाया। विभाग द्वारा रियायती दर पर आवश्यक कृमिपालन समूह एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने कृमिपालन की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया, जिसका सीधा लाभ उनकी आय पर पड़ा।
टसर कृमिपालन से ध्रुवकुमार की आमदनी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2024-25 में 3 लाख 21 हजार 058 रुपये, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 63 हजार 270 रुपये तथा वर्ष 2026-27 में अब तक 77 हजार 719 रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं।
रेशम उत्पादन से हुई इस अतिरिक्त आमदनी ने ध्रुवकुमार के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ ही बच्चों की शिक्षा पर भी बेहतर तरीके से खर्च करना संभव हो रहा है।
ध्रुवकुमार की सफलता ग्रामीण किसानों के लिए प्रेरणादायक है। यह उदाहरण बताता है कि पारंपरिक खेती के साथ टसर कृमिपालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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