रायपुर/बिलासपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद वन विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर सभागार, तिलक नगर, बिलासपुर में “जलवायु परिवर्तन” विषय पर आधारित विविध जनजागरूकता कार्यक्रमों एवं राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण विषयक छत्तीसगढ़ी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति से हुई, जिसमें एम.डी. मानिकपुरी, राम कुमार श्रीवास एवं उनके साथियों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को पर्यावरण चेतना से सराबोर कर दिया।
प्रातः आयोजित ड्राइंग एवं पेंटिंग प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, अध्यक्ष डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि विष्णु कुमार तिवारी एवं महेश श्रीवास ने माँ सरस्वती, भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. विवेक तिवारी, शीतल प्रसाद पाटनवार, बालगोविंद अग्रवाल, बाली यदु, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, राम निहोरा राजपूत, ध्रुव देवांगन एवं एम.डी. मानिकपुरी ने पुष्पमालाओं से किया।
चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के शताधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए वन्यजीवन संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा प्लास्टिक प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर निर्णायक मोना कैवर्त्य, उषा भांगे, पूर्णिमा तिवारी एवं राजू कौशिक का भी सम्मान किया गया।
मुख्य समारोह छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार के मुख्य आतिथ्य, थावे विद्यापीठ गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता तथा डॉ. एस.एस.डी. बड़गैया, शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, विष्णु कुमार तिवारी, हेमंत कुमार गौर एवं संजय शर्मा के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।
समिति के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने स्वागत भाषण में कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन विकास और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मुख्य अतिथि डॉ. अभिलाषा बेहार ने कहा कि बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण आज मानवता के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति पिछले तीन दशकों से पर्यावरण जागरूकता के लिए अनुकरणीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जल, वायु और सामाजिक प्रदूषण ने जनजीवन को संकट में डाल दिया है तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत जागरूकता ही भविष्य को सुरक्षित बना सकती है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी के महाकवि कपिलनाथ कश्यप की कृतियों की प्रदर्शनी गणेश कश्यप द्वारा लगाई गई, वहीं श्रीमती पाटनवार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ी व्यंजन मेले का भी आयोजन किया गया, जिसने लोगों का विशेष आकर्षण प्राप्त किया।
सायंकाल आयोजित पर्यावरण केन्द्रित काव्य गोष्ठी में सान्वी कश्यप, श्रिया कश्यप, राजेश सोनार, ध्रुव देवांगन, पूर्णिमा तिवारी, विक्रम धर दीवान, राजेश वस्त्रकार, मायना रंगारी, एम.डी. मानिकपुरी, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, सुनीता त्रिपाठी, राम कुमार श्रीवास, शीतल प्रसाद पाटनवार एवं चंदन त्रिपाठी सहित अनेक कवियों ने पर्यावरण संरक्षण विषयक रचनाओं का काव्य पाठ किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत आस्था तिवारी, सृष्टि गर्ग और शौर्या भारत ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। वहीं गीत-संगीत एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में काशवी कश्यप, आरिशा कश्यप, नियति कश्यप, मायशा रंगारी, अक्षरा माडीकर एवं काश्वी परस्ते सहित कई प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सायं 6 बजे आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में समाज, साहित्य, कला, पर्यावरण, पत्रकारिता, पुरातत्व संरक्षण, रंगमंच, सिनेमा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही ड्राइंग एवं पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
सम्मानित होने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृति कर्मी डॉ. दीनदयाल साहू तथा डॉ. डी.पी. देशमुख (भिलाई) विशेष रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन बालगोविंद अग्रवाल द्वारा किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी, साहित्यकार, कलाकार, विद्यार्थी एवं आम नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

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