26 जुलाई को आषाढ़ मास का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. वैदिक पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और बाधाएं दूर होकर मोनकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही भगवान शिव साधक पर अपनी कृपा भी बनाए रखते हैं. आषाढ़ का दूसरा प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए यह रवि प्रदोष व्रत कहलाया जा रहा है. आइए जानते हैं इसकी तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि.
रवि प्रदोष व्रत तिथि
हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत आज यानी 26 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 58 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 27 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 15 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत आज यानी 26 जुलाई को रखा जा रहा है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त 26 जुलाई को शाम 7 बजकर 16 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. सभी भक्त इस अवधि में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं.
पूजा विधि
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.
इसके बाद 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, धूप, दीप, गंध, चावल आदि नौवेघ अर्पित करें.
पूजा के समय शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है.
इसके बाद शिव के मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें.
प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें.
दिनभर उपवास रखते हुए मन में शिव का स्मरण करें.
शाम के समय फिर स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें.
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