आज वरुथिनी एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें मंत्र, आरती और भोग…
आज यानी 13 अप्रैल 2026, दिन सोमवार को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. वरुथिनी एकादशी का दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास होता है.
वरुथिनी एकादशी हर साल वैशाख माह की कृष्ण पक्ष एकादशी को मनाई जाती है. आज वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से आपके जीवन में खुशियों का आगमन होगा. इसके साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि आएगी. चलिए वरुथिनी एकादशी व्रत के शुभ मुहूर्त, पूजा मुहूर्त, मंत्र और आरती के बारे में जानते हैं.
वरुथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
सूर्योदय- सुबह 05 बजकर 58 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:28 से 05:13
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:51 से 05:58
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:56 से दोपहर 12:47
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:30 से 03:21
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06:44 से 07:07
सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:46 से 07:53
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. घर के पूजा स्थल की सफाई कर चौकी लगाएं. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान को पीले वस्त्र और चंदन का तिलक अर्पित करें. फूल, फल, मिठाई आदि चीजों से भोग लगाएं. मंत्रों का जाप करें और आरती कर पूजा संपन्न करें. भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.
वरुथिनी एकादशी मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय
मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः।
मंगलम पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥
श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि
भगवान विष्णु प्रिय भोग
आज वरुथिनी एकादशी के दिन आपको भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर उन्हें उनके प्रिय भोग अर्पित करने चाहिए. भगवान विष्णु को आप पीले फल जैसे केला और आम अर्पित करें. पीली मिठाई, मखाना या साबूदाने की खीर और पंचामृत का भोग लगा सकते हैं. इन चीजों का भोग लगाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे.
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
- आज वरुथिनी एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें मंत्र, आरती और भोग… - April 13, 2026
- नाश्ते में बनाएं दाल का यह स्वादिष्ट सैंडविच, स्वाद में लाजवाब और प्रोटीन से भरपूर है यह ब्रेकफास्ट… - April 13, 2026
- महंगे शैम्पू के बाद भी टूट रहे हैं बाल? सिर्फ ‘स्ट्रेस’ नहीं, ये 5 कारण हैं हेयर फॉल के असली विलेन… - April 13, 2026
