सूरजपुर जिले के भटगांव से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल के व्याख्याता की घिनौनी करतूत ने न सिर्फ गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है, बल्कि पूरे शिक्षा महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
आरोप है कि परीक्षा केंद्र में दो नाबालिग रिश्तेदार बहनों को पास कराने का लालच देकर आरोपी व्याख्याता ने उनके साथ अश्लील हरकत की। मामले में भटगांव पुलिस ने छेड़छाड़ और POCSO एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

“पास कराने” के नाम पर भरोसे से खिलवाड़

घटना 16 फरवरी की है, जब 11वीं की परीक्षा के दौरान यह शर्मनाक कृत्य सामने आया।
पीड़िता के भाई ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि आरोपी व्याख्याता ने परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर उसकी बहन और भांजी को अपने प्रभाव में लिया और उनके साथ गलत व्यवहार किया।
इस घटना से दोनों नाबालिग छात्राएं मानसिक रूप से गहरे सदमे में हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 74, 75 और POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच में सच आया सामने, कमेटी ने लगाई मुहर
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति में:
लता बेक (सहायक संचालक शिक्षा)
प्राचार्य मिनी प्रसन्ना
बलविंदर कौर
शामिल रहीं। जांच के बाद समिति ने घटना की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट डीईओ को सौंप दी है। अब दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पुराना रिकॉर्ड भी दागदार – पहले भी हो चुका है निलंबित
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि आरोपी का यह पहला अपराध नहीं है।
करीब 10 साल पहले भी वह अश्लील हरकत के आरोप में निलंबित हो चुका है। बाद में उसका तबादला किया गया, लेकिन हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के कारण वह फिर उसी स्कूल में पदस्थ हो गया।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—
क्या विभाग ने पहले की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया?
क्या लापरवाही के कारण ही यह घटना दोबारा हुई?
अधिकारी का बयान
डीईओ अजय मिश्रा ने कहा—
“मामला संज्ञान में आते ही जांच कराई गई है। प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए संचालक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी जाएगी।”
शिक्षा तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना न केवल एक शिक्षक की आपराधिक मानसिकता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सिस्टम की लापरवाही किस तरह मासूम बच्चों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है।
आरोपी अब भी फरार है
पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं
और अभिभावकों के मन में डर और गुस्सा दोनों है
अब देखना होगा कि क्या इस बार न्याय होगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा…
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