विकास की बाट जोह रहा फर्सवानी पंचायत..सरपंच मोंगरा सारथी और चंद्रकिशोर सारथी ने प्रशासन से की विकास कार्यों की मांग.
सारंगढ़-बिलाइगढ़ जिले की ग्राम पंचायत फर्सवानी आज विकास के नक्शे पर एक ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गई है। एक ओर जहाँ जिला प्रशासन ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास’ का नारा बुलंद करता है, वहीं दूसरी ओर फर्सवानी की गलियां, जर्जर स्कूल और सूखे नल प्रशासन के गाल पर तमाचे की तरह हैं।
गाँव के विकास के लिए चिंतित और जनहित को सर्वोपरि रखने वाली सरपंच श्रीमती मोंगरा सारथी एवं सक्रिय सरपंच प्रतिनिधि चंद्रकिशोर सारथी ने अब शासन-प्रशासन से विकास कार्यों की मांग की है।
सरपंच की सक्रियता, समस्याओं का अंबार-
फर्सवानी के चहुंमुखी विकास के लिए निरंतर प्रयासरत सरपंच मोंगरा सारथी ने समस्याओं का जो कच्चा चिट्ठा खोला है, वह चौंकाने वाला है।
नल-जल योजना का फ्लॉप शो-
‘हर घर जल’ का दावा फर्सवानी में दम तोड़ रहा है। सैकड़ों घर आज भी पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। सरपंच प्रतिनिधि चंद्रकिशोर सारथी ने स्पष्ट किया कि पुरानी टंकी नाकाफी है और दूसरी टंकी की फाइल धूल फांक रही है।
अंधेरे में भविष्य और गांव-
हायर सेकेंडरी स्कूल में 350 बच्चों के बैठने तक की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वहीं, गांव की गलियां महीनों से अंधेरे में डूबी हैं क्योंकि बिजली खंभों की मरम्मत के लिए प्रशासन के पास वक्त नहीं है।
सड़क नहीं, ये तो कचरे के टापू हैं-
घनश्याम डॉक्टर मार्ग और लोहारिनडीपा मार्ग की हालत ऐसी है कि एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच सकती। 3 किलोमीटर की सीसी रोड और खेत के पास पुलिया का निर्माण न होना प्रशासन की बड़ी विफलता है।
स्वच्छता और स्वास्थ्य से खिलवाड़-
अवैध शराब पर सरपंच का कड़ा रुख
पंचायत के विकास के साथ-साथ सामाजिक सुधार के लिए तत्पर सरपंच मोंगरा सारथी ने अवैध महुआ शराब के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दर्जनों घरों में अवैध शराब बन रही है, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा है। महिला शक्तियों के साथ मिलकर वे इसके खिलाफ खड़ी हैं, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग बेसुध है।
इसके अलावा, नाली निर्माण के अभाव में सड़कों पर बहता गंदा पानी और कचरे का अंबार गांव में महामारी फैलने का संकेत दे रहा है।
मुक्तिधाम की जर्जरता और पंचायत भवन का अभाव-
सरपंच ने भारी मन से बताया कि जहाँ जीवित लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वहां अंतिम विदाई के लिए बना मुक्तिधाम भी जर्जर है। वहीं, स्वयं सरपंच को पंचायत चलाने के लिए भवन तक मयस्सर नहीं है, जो प्रशासनिक विडंबना की पराकाष्ठा है।
कलेक्टर साहब, अब तो संज्ञान लीजिए!
सरपंच मोंगरा सारथी और चंद्रकिशोर सारथी गांव के हित के लिए पूरी निष्ठा से लड़ रहे हैं। उन्होंने पूर्व में सांसद राधेश्याम राठिया को भी आवेदन दिया, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ रहा। अब सबकी निगाहें कलेक्टर महोदय पर टिकी हैं।
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