‘मिशन वात्सल्य’ या ‘मिशन भ्रष्टाचार’?सारंगढ़ महिला विकास विभाग का डिजिटल ‘सांप-सीढ़ी’ का खेल!शुक्रवार को फरमान, सोमवार को इंटरव्यू और मंगलवार को गायब!सरकारी वेबसाइट से रातों-रात उड़ गया भर्ती का आदेश..पढ़िए ‘छुट्टी वाले’ जुगाड़ का गणित..?
सारंगढ़ | सरकारी सिस्टम में कछुए की चाल तो आपने देखी होगी, लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग ने तो ‘उसेन बोल्ट’ को भी पीछे छोड़ दिया है। विभाग ने संविदा भर्ती के नाम पर ऐसा ‘शॉर्टकट’ मारा कि नियम-कायदे बीच रास्ते में ही हांफने लगे।
‘छुट्टी वाले’ जुगाड़ का गणित-
विभाग के ‘साहबों’ ने अपनी मेधा का परिचय देते हुए 13 मार्च (शुक्रवार) को भर्ती का आदेश निकाला। अब चूंकि शनिवार और रविवार को दफ्तर बंद रहते हैं, तो आम बेरोजगारों को खबर लगने का सवाल ही नहीं उठता।
योजना एकदम फुलप्रूफ थी—16 मार्च (सोमवार) को चुपके से चहेतों का इंटरव्यू निपटा लिया जाए। इसे कहते हैं ‘मैनेजमेंट’, जहाँ आम जनता सोती रही और विभाग ने अपनी ‘गोटी’ सेट कर ली।
वेबसाइट से गायब, जैसे गधे के सिर से सींग! –
जैसे ही इस ‘डिजिटल चालाकी’ की भनक उच्चाधिकारियों को लगी और शिकायत हुई, विभाग ने अपनी इज्जत बचाने के लिए वह किया जो वो सबसे अच्छा करते हैं—साक्ष्य मिटाना। जिला प्रशासन की वेबसाइट से वह आदेश ऐसे गायब हुआ जैसे कोई जादू का खेल हो। सवाल यह है कि अगर सब कुछ पारदर्शी था, तो फाइल को ‘मिस्टर इंडिया’ बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
भ्रष्टाचार के ‘नये कीर्तिमान’-
यह विभाग पहले ही मुख्यमंत्री कन्या विवाह में ‘घटिया सामान’ बांटकर सुर्खियों में रहा है। अब संविदा भर्ती के बहाने ‘अपनों’ को रेवड़ियां बांटने की तैयारी थी। संरक्षण अधिकारी से लेकर डेटा एंट्री ऑपरेटर तक के पदों पर बैकडोर एंट्री का यह ‘खेला’ फिलहाल तो रुक गया है, लेकिन अधिकारियों की खामोशी बहुत कुछ कह रही है।
सवाल –
“साहब को अपनों की फिक्र इतनी थी कि विज्ञापन की स्याही सूखने से पहले ही कुर्सी पर बैठाने की तैयारी कर ली। शुक्र है शिकायत हो गई, वरना सोमवार को जॉइनिंग लेटर भी बंट जाता!”
प्रमुख बिंदु जिन पर विभाग ‘मौन’ है-
दो दिन की मोहलत क्यों? क्या छत्तीसगढ़ के बेरोजगार इतने हाई-टेक हैं कि बंद दफ्तरों के बीच आदेश पढ़कर इंटरव्यू देने पहुँच जाएं?
अधिकारी ‘नॉट रीचेबल’ क्यों? जिला कार्यक्रम अधिकारी उत्तम कुमार जी का फोन अब तक ‘मौन व्रत’ पर क्यों है?
पुराना रिकॉर्ड-
कन्या विवाह के सामान से लेकर भर्ती तक, हर जगह ‘कमीशन’ की गंध क्यों आ रही है?
यह महज एक भर्ती नहीं, बल्कि सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने का एक भद्दा मजाक था। अब देखना यह है कि जांच की ‘आंच’ साहब की कुर्सी तक पहुंचती है या फाइल हमेशा के लिए ‘गायब’ ही रहेगी।

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