अमोंदा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर उठे सवाल..झोलाछापों औऱ बिना क्लिनिकल रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक संचालन का आरोप..प्रशासनिक सतर्कता की दरकार, ग्रामीणों ने जताई चिंता..
सक्ती: जिले के ग्राम अमोंदा सहित आस-पास के ग्रामीण अंचलों में संचालित निजी क्लीनिकों की वैधानिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई ऐसे क्लीनिक संचालित हो रहे हैं जिनके पास स्वास्थ्य विभाग का आवश्यक पंजीकरण (Nursing Home Act/Clinical Establishment Act) या वैध चिकित्सकीय डिग्री का अभाव है। उचित निगरानी की कमी के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कई गांवों में क्लीनिकों का जाल-
हसौद, अमोंदा, गुज़ीयाबोर, रनपोटा, और लालमाटी जैसे क्षेत्रों में निजी क्लीनिकों की संख्या में इजाफा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, इन क्लीनिकों में विशेषज्ञता के बिना ही गंभीर बीमारियों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग के मानकों का पालन किए बिना ही इन केंद्रों का संचालन धड़ल्ले से जारी है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की मंशा पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।
जागरूकता का अभाव और बढ़ता जोखिम-
सस्ते और सुलभ इलाज की तलाश में ग्रामीण अक्सर इन केंद्रों की शरण लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित जांच और अधूरी जानकारी के दी गई दवाएं मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। कई बार स्थिति बिगड़ने पर मरीजों को आनन-फानन में जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है, जो कि चिंता का विषय है।
नियमों का हवाला और प्रशासनिक जिम्मेदारी-
नियमतः किसी भी प्रकार की क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए Clinical Establishments Act के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में समय-समय पर जानकारी दिए जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई या क्लिनिकों का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है।
उचित जांच की मांग-
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि
क्षेत्र में संचालित सभी निजी क्लिनिकों के दस्तावेजों की गहन जांच की जाए।
बिना डिग्री और बिना अनुमति के चल रहे केंद्रों को सीलबंद किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाया जाए ताकि लोगों को निजी जोखिम न उठाना पड़े।
नोट: यह समाचार प्राप्त सूचनाओं और जनहित की चिंताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मानकों के प्रति शासन का ध्यान आकर्षित करना है।
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