सारंगढ़-बिलाईगढ़ (बरमकेला): केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि दर्जनभर पंचायतों में काम अधूरा होने के बावजूद कागजों पर इसे ‘पूर्ण’ दिखाकर हैंडओवर कर दिया गया है, जबकि ग्रामीणों के नलों में आज भी पानी की एक बूंद नहीं टपकी है।

निर्माण अधूरा, फिर भी कर दिया हैंडओवर-
हैरानी की बात यह है कि बरमकेला ब्लॉक के कई गांवों (जैसे- अमकोनी, जमझोरी, अमेरी, कोसमपाली, हिर्री, सुलपेंधली, बड़े नवपारा, पुष्पझर, केंटीपाली, सलिहामुड़ा, सुकपाली, सूरजगढ़ और बिड़द) में पीएचई विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में काम को पूरा बताकर पंचायतों को सुपुर्द कर दिया है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब पाइपलाइन बिछी ही नहीं और पानी की टंकी सूखी पड़ी है, तो यह हैंडओवर कैसे संभव हुआ?
आधा फीट में दबाई पाइपलाइन-
प्रोजेक्ट में तकनीकी लापरवाही की हदें पार कर दी गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार
नियमों की अनदेखी:
जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन को कम से कम 2 से 3 फीट गहराई में बिछाना था, लेकिन पेटी ठेकेदार द्वारा इसे महज आधा फीट नीचे ही दबा दिया गया है।
क्षतिग्रस्त सड़कें:
पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सीसी सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है, जिससे गांव की गलियां कीचड़ और मलबे से भर गई हैं।
गुणवत्ता विहीन सामग्री:
कइयों जगहों पर घटिया कंपोजिट पाइप का इस्तेमाल किया गया है, जो प्रेशर झेलने में सक्षम नहीं हैं।
प्रशासन और ठेकेदार के बीच ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कलेक्टर की समीक्षा बैठकों के बाद भी पीएचई विभाग के अधिकारी और ठेकेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। विभाग केवल दिखावे के लिए नोटिस जारी करता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। आरोप है कि सौमित्र कंस्ट्रक्शन कंपनी और पेटी ठेकेदार सौरभ गर्ग (शक्ति) के खिलाफ बार-बार शिकायत के बावजूद उन्हें अभी तक हटाया नहीं गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी –
बरमकेला ब्लॉक के ग्रामीण अब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और विभाग की मिलीभगत से केंद्र सरकार की योजना को पलीता लगाया जा रहा है। यदि जल्द ही पाइपलाइन को सही तरीके से बिछाकर जल आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो क्षेत्र के लोग सीधे मुख्यमंत्री से इसकी लिखित शिकायत करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
मुख्य बिंदु जो योजना की विफलता दर्शाते हैं-
करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं।
बिना टेस्टिंग और सफल ट्रायल के कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया।
पंचायत प्रतिनिधियों को भरोसे में लिए बिना ही अधूरे कार्यों का हैंडओवर किया गया।
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