सालसर और मां बंजारी के साम्राज्य पर तालाबंदी,गिरी गाज..’बाकी’ सफेदपोशों पर कब चलेगा हथौड़ा?
सारंगढ़-बिलाइगढ़। बरमकेला का कटंगपाली इलाका एक बार फिर माफियाओं की चीख-पुकार और प्रशासनिक कार्रवाई का गवाह बना। एसडीएम वर्षा बंसल ने अपनी टीम के साथ औचक दबिश देकर जिस तरह से ‘सालसर इंटरप्राइजेस’ और ‘मां बंजारी मिनरल्स’ के साम्राज्य पर तालाबंदी की है, उसने रसूखदारों की नींद उड़ा दी है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है— क्या यह केवल ‘ट्रेलर’ है या पूरी फिल्म बाकी है?
नियमों का कत्ल और कागजों की हेराफेरी-
साल्हेओना और कटंगपाली में संचालित इन क्रशर संस्थानों में जब प्रशासनिक टीम घुसी, तो वहां कानून की धज्जियां उड़ती मिलीं। सालसर इंटरप्राइजेस के पास न तो डायवर्जन के कागज थे और न ही प्रदूषण मंडल की अनुमति। पिछले साल सील होने के बावजूद इस संस्थान के संचालक की ढिठाई ऐसी थी कि न पेड़ लगाए गए, न धूल रोकने का इंतजाम किया गया। वहीं मां बंजारी मिनरल्स में भी कागजी खानापूर्ति और धूल नियंत्रण की व्यवस्था नदारद थी। एसडीएम के कड़े तेवरों के आगे गुमराह करने की हर कोशिश नाकाम रही और दोनों संस्थानों को सील कर दिया गया।
विवादित जमीन पर गरजती पोकलेन का ‘खेल’ खत्म-
गौघटा मार्ग पर एक विवादित भूमि पर अवैध उत्खनन कर रही पोकलेन मशीन को जब प्रशासन ने घेराबंदी कर पकड़ा, तो रसूखदारों के पसीने छूट गए। रायपुर निवासी आकाश शर्मा की इस मशीन को जब्त कर ग्राम पंचायत की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
‘चुनिंदा’ कार्रवाई या संपूर्ण सफाई?
प्रशासन की इस आक्रामक शैली ने खदान मालिकों में दहशत तो पैदा की है, लेकिन इलाके की जनता और जागरूक लोग एक तीखा सवाल पूछ रहे हैं। बरमकेला और कटंगपाली क्षेत्र में दर्जनों ऐसे क्रशर और अवैध खदानें अब भी सीना तानकर चल रही हैं, जहाँ अनियमितताओं का अंबार लगा हुआ है। * क्या प्रशासन के पास उन रसूखदारों की सूची है जो सिस्टम को अपनी जेब में रखकर चलते हैं?
क्या अन्य क्रशर संचालकों को केवल ‘दिखावटी खौफ’ में रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है?
उन दर्जनों संस्थानों पर ताला कब लटकेगा जहाँ न एनओसी है और न ही मानकों का पालन हो रहा है?
रसूख की ढाल अब होगी बेअसर?
एसडीएम वर्षा बंसल की कार्यशैली ने साफ संकेत दिया है कि मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन असली चुनौती उन ‘बड़े खिलाड़ियों’ पर हाथ डालने की है जो राजनीतिक और आर्थिक रसूख के पीछे छिपे बैठे हैं। जनता अब टकटकी लगाकर देख रही है कि प्रशासन का अगला निशाना कौन होगा— या फिर अन्य माफिया इसी तरह नियमों को रौंदकर धरती का सीना छलनी करते रहेंगे।
क्षेत्र के अन्य अवैध संचालकों में हड़कंप जरूर है, लेकिन कार्रवाई का ‘असली डोज’ मिलना अभी बाकी है।

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