भगवान शिव के भक्त महाशिवरात्रि व्रत का बेसब्री से इंतजार करते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ और दुर्लभ संयोग बनेंगे.

इसलिए इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है. आमतौर पर महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के भक्त शिव मंदिर जाकर उनकी विशेष पूजा अर्चना करते हैं. देश-दुनिया में भगवान शिव के कई मंदिर मौजूद हैं और प्रत्येक से जुड़ी अपनी खास मान्यताएं हैं. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनकी गुत्थी आज का आधुनिक विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है. इन मंदिरों में होने वाली घटनाएं किसी चमत्कार से कम नहीं लगतीं. ऐसे में आइए जानते हैं महादेव के उन 5 मंदिरों के बारे में.
स्तंभेश्वर महादेव (गुजरात)
गुजरात में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में बेहद अनोखा और दुनियाभर में प्रसिद्ध है. खंभात की खाड़ी के किनारे स्थित यह मंदिर दिन में दो बार पूरी तरह से समुद्र के भीतर समा जाता है. ज्वार के समय समुद्र की लहरें मंदिर को पूरी तरह ढक लेती हैं और शिवलिंग जलमग्न हो जाता है. हालांकि, कुछ घंटों बाद जब पानी उतरता है, तो मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है. कहते हैं कि यहां समुद्र खुद महादेव का जलाभिषेक करते हैं.
अचलेश्वर महादेव (राजस्थान)
राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर अपनी एक अनोखी विशेषता के लिए विश्व प्रसिद्ध है. यहां स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. सूर्य की किरणों के साथ सुबह यह शिवलिंग लाल नजर आता है, दोपहर में इसका रंग केसरिया हो जाता है और शाम ढलते-ढलते यह सांवले रंग में बदल जाता है. वैज्ञानिक आज भी इस परिवर्तन के पीछे का सही कारण नहीं खोज पाए हैं.
छाया सोमेश्वर मंदिर (तेलंगाना)
तेलंगाना के नलगोंडा जिले में स्थित इस मंदिर की वास्तुकला आज के इंजीनियरों के लिए भी एक पहेली है. मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर हमेशा एक खंभे (स्तंभ) की छाया बनी रहती है. आश्चर्य की बात यह है कि शिवलिंग के आसपास ऐसा कोई खंभा है ही नहीं जिसकी परछाई वहां पड़ सके. यह छाया कहां से आती है, आज तक इसका जवाब नहीं मिल सका.
लक्ष्मणेश्वर महादेव (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ के इस प्राचीन मंदिर को लक्षलिंग भी कहा जाता है क्योंकि यहां के शिवलिंग में एक लाख छोटे-छोटे छेद हैं. इन लाखों छेदों में से एक छेद ऐसा है जिसे पाताल लोक का द्वार कहा जाता है. इसमें आप कितना भी जल अर्पित करें, वह तुरंत सोख लिया जाता है और कभी भरता नहीं. वहीं, एक दूसरा छेद ऐसा है जो भीषण गर्मी में भी हमेशा जल से लबालब भरा रहता है.
हरिहरेश्वर मंदिर (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के सोलापुर में स्थित यह मंदिर मूर्तिकला और रहस्य का बेजोड़ उदाहरण है. साल 1999 में खुदाई के दौरान मिले इस विशाल शिवलिंग की बनावट रोंगटे खड़े कर देने वाली है. लगभग 2 मीटर ऊंचे और 4.5 टन वजन वाले इस शिवलिंग पर 359 चेहरे उकेरे गए हैं. सबसे खास बात यह है कि हर चेहरे के भाव एक-दूसरे से अलग हैं. 11वीं शताब्दी की यह कलाकृति शिव और विष्णु के एकाकार रूप को समर्पित है.
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