पुलिस की लापरवाह व्यवस्था और निष्क्रियता के कारण नायब तहसीलदार व पटवारी तक नहीं बचे सुरक्षित!
रायगढ़। घरघोड़ा पुलिस की लापरवाह व्यवस्था और निष्क्रियता का ऐसा नंगा नाच देखने को मिल रहा है कि अब शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के घर तक सुरक्षित नहीं बचे हैं। कंचनपुर स्थित शासकीय कॉलोनी में एक बार फिर चोरों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देते हुए एक ही रात में नायब तहसीलदार, पटवारी सहित पाँच घरों के ताले तोड़ डाले।
यह कोई पहली घटना नहीं है—बल्कि तीसरी बार इसी कॉलोनी को निशाना बनाया गया है। पहली बार सात घर, दूसरी बार तीन, और अब पाँच घर—लेकिन हर बार पुलिस बस खानापूर्ति करती रही और एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पुलिस की इस सुस्त कार्यशैली और अपराधियों के खिलाफ लगातार शून्य कार्रवाई ने चोरों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब उन्हें न तो किसी का डर है, न ही कानून का भय। जहाँ शासकीय अधिकारी सुरक्षित नहीं, वहाँ आम जनता की सुरक्षा की कल्पना ही बेमानी है।
कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि अब हर रात डर के साए में सोना उनकी मजबूरी बन चुकी है। न सुरक्षा है, न गश्त। शिकायतों के बावजूद पुलिस की चुप्पी और निष्क्रियता इस बात की गवाही देती है कि या तो तंत्र पूरी तरह विफल है, या फिर मिलीभगत के संदेह से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब बड़ा सवाल?….
क्या शासकीय कॉलोनियों में भी पुलिस सुरक्षा देने में असमर्थ है?…कब होगी इन चोरियों की खुलासा?…. अगला नंबर किसका है?
जनता, अधिकारी और कर्मचारी—all under threat—और पुलिस? अभी भी गहरी नींद में!
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