अयोध्या की तरह ही भगवान राम के नौनिहाल छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में मनाया गया अद्भुत दीवाली..एक साथ जले 51 हज़ार दिए…
रायपुर. भगवान राम के जन्म स्थान उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मनाए जा रहे भव्य दीपोत्सव की चर्चा पूरे देश में हो रही है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस दिवाली भगवान राम की माता कौशल्या के जन्मस्थान पर मनाई गई दिवाली ने भी इतिहास रचा है.
भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर (Mata Kaushalya Temple) में राज्य के इतिहास में पहली बार दिवाली (Diwali) का भव्य आयोजन किया गया है. दीपोत्सव के तहत बीते गुरुवार की शाम को माता कौशल्या का मंदिर दीपों की रौशनी से जगमगा उठा. मंदिर में एक साथ 51 हजार दीये जलाए गए. इन दीपों को जलाने में करीब 1800 लीटर तेल का उपयोग किया गया.
चंदखुरी (Chandkhuri) में माता कौशल्या मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रमेश कुमार चौबे ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी इस तरह का आयोजन मंदिर में नहीं देखा. रमेश कहते हैं- एक समय ऐसा भी था जब साल में दो बार ही यहां लोग आते थे. एक बार मंदिर की पुताई के लिए और दूसरी बार चैत्र नवरात्रि में घर में जलाई गई माता कौशल्या के नाम की जोत को मंदिर में रखने के लिए. मंदिर के पास बेर की कटीली झाड़ियां थीं और लोग यहां आने से कतराते थे. 1990 में गांव के 12 लोगों ने चैत्र नवरात्रि से मंदिर में 12 जोत जलाने की शुरुआत की थी. उस समय मंदिर के आसपास पानी भरा रहता था तो हम लोग तैरकर मंदिर तक पहुंचते थे. इसके बाद मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ. इसके बाद बांस की चैली (नाव) से लोग आने लगे.
पहले नहीं हुआ ऐसा आयोजन-
पंडित रमेश कहते हैं हमने या गांव के किसी व्यक्ति ने कल्पना नहीं की थी रामलला की जननी माता कौशल्या के धाम पर भी कभी सरकार इस तरह से काम करेगी. त्रेता के बाद द्वापर युग में भले ही इस तरह का कोई आयोजन हुआ हो, लेकिन मुझे नहीं लगता कि कलियुग में कभी भगवान राम की ननिहाल में इस तरह दीपोत्सव मनाया गया होगा. यह आयोजन भगवान राम की ननिहाल को तीर्थस्थल बनाने में सहायक साबित होगा. चंदखुरी के 70 वर्षीय ग्रामीण रामकुमार साहू ने कहा कि इस दिवाली में लग रहा है कि वास्तव में चंदखुरी भगवान राम की ननिहाल है. दीपावली पर ऐसा उत्सव श्रीराम के प्रति सच्ची आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है. सीएम भूपेश बघेल की पहल पर ऐसा किया जा रहा है.
6 हजार वालेंटियर ने संभाली कमान-
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि दीप प्रज्जवलित करने के लिए दिवाली में 600 वालेंटियर शाम पांच बजे से सक्रिय हो गए. दीयों में भरने के लिए करीब 1800 लीटर तेल का इंतजाम किया गया. दीपक जलाने की प्रक्रिया शाम पांच बजे से दीयों को सजाने से शुरू हुई. एक टीम ने दीप सजाए तो दूसरी ने उनमें बाती रखने का काम किया गया. तीसरी टीम ने दीयों में तेल भरा. दीयों में तेल डालने के साथ ही उन्हें जलाने का काम शुरू किया गया. योजनाबद्ध तरीके से करने के कारण पहली बार हो रहे इस आयोजन में किसी तरह की समस्या दिखाई नहीं दी. इस पूरी काम में राजीव मितान क्लब के युवाओं ने सक्रिय सहयोग किया।
