अद्भुत: -भारत में है एक ऐसा पेड़… जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे पुलिस रहती है तैनात..एक वर्ष में होता है लाखों रुपये खर्च, जाने क्यों…
मध्यप्रदेश: आप देश के बॉर्डर के बारे अच्छे से जानते हैं पुलिस वहां पैहरा देती है। सुरक्षा करती है। आपने वीवीआईपी लोगों के आगे पीछे भी कई पुलिस वालों को देखा होगा, जो उनकी सुरक्षा में हर समय तैनात रहते हैं। आपने कई बड़े लोग भी देखें होंगे, जिनकी सुरक्षा में पुलिस वाले दिन-रात लगे रहते हैं, लेकिन आपने कभी इस बारे में सुना कि पुलिस वाले एक पेड की सुरक्षा में तैनात है। क्या आपने कभी किसी वीवीआईपी पेड़ के बारे में सुना है।
आपने किसी व्यक्ति विशेष की सुरक्षा के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कोई पेड़ इतना VVIP हो सकता है जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे गार्ड्स तैनात रहते हों, एक पत्ता भी टूट जाता है तो सुरक्षा में लगा प्रशासन चिंतित हो जाता है। आपने किसी व्यक्ति विशेष की सुरक्षा के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कोई पेड़ इतना VVIP हो सकता है जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे गार्ड्स तैनात रहते हों, एक पत्ता भी टूट जाता है तो सुरक्षा में लगा प्रशासन चिंतित हो जाता है। तमाम तरह की सुरक्षा लिए यह अतिविशिष्ट पेड़ मध्यप्रदेश की राजधानी के पास स्थित सांची में है।
पेड़ की देखरेख पर हर साल खर्च होते हैं 12 से 15 लाख
नहीं, कोई नहीं हम आपको बताते हैं। ये पेड़ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ी पर लगा है और मध्य प्रदेश की सरकार इस पेड़ की देखरेख पर हर साल 12 से 15 लाख रुपए खर्च करती है।
यहां तक इस पेड़ की सुरक्षा के लिए हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे चार पुलिस वाले तैनात रहते है। सौ एकड़ की पहाड़ी पर लोहे की लगभग 15 फीट ऊंची जाली के अंदर लहलहाता हुआ नजर आता है ये वीवीआईपी बोधि पेड़।
जिला कलेक्टर की निगरानी में होता है सब-
इतना ही नहीं इस पेड़ की सिचाई के लिए सांची नगरपालिका ने अलग से पानी के टैंकर का इंतजाम किया जाता है। साथ ही पेड़ को बीमारी से बचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी हर हफ्ते वहां का दौरा करते हैं और यह सब जिला कलेक्टर की निगरानी में होता है। ये तो कुछ भी नहीं है अगर इस पेड़ का एक भी पत्ता सुख जाता है तो पूरा प्रशासन चौकन्ना हो जाता है। पेड़ तक पहुंचने के लिए भोपाल-विदिशा हाईवे से पहाड़ी तक पक्की सड़क भी बनाई गई है
भागवान बुद्ध की आखिरी निशानी है ये वीवीआईपी पेड़–
दरअसल, इस पेड़ को इतना महत्व देने के पीछे मान्यता यहा है कि इस पेड़ को बोधिवृक्ष कहा जाता है और इसे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने लगाया था। यह वही बोधि वृक्ष की टहनी है जिसके नीचे गौतम बुद्ध को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। अब आप समझे इस पेड़ के वीवीआईपी होने के पीछे क्या राज है। ये गौतम बुद्ध के होने की निशानी है। इसलिए ही इसको इतना महत्व दिया जाता है और इसकी सुरक्षा से लेकर बंदोबस्त तक पर पूरा ध्यान दिया जाता है।
सांची और सलामतपुर के बीच हाईवे किनारे एक छोटी पहाड़ी पर सुरक्षा जालियों के बीच एक पेढ़ लहलहा रहा है। सामान्य तौर पर लोग इसे पीपल का पेड़ मानते हैं, लेकन इसकी कड़ी सुरक्षा को देख उनके दिमाग में यह प्रश्र जरूर उठता है कि इस पेड़ की इतनी सुरक्षा क्यों। लगभग 15 फीट ऊंचाई तक जालियों से घिरा और आस-पास पुलिस के जवान। ऐसा क्या खास है इस पेड़ मेें। हाईवे से गुजरने वाले जिन लोगों को यह नहीं मालूम कि इस पेढ़ की खासियत क्या है, क्यों यह इतना महत्वपूर्ण है। उन्हे आश्चर्य जरूर होता है। यह पेड़ वाकई बहुत खास है।
बौद्ध धर्म के अनुयाईयों के लिए यह श्रद्धा का केंद्र है, तो प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के लिए श्रीलंकाई राष्ट्रपति की सौगात। लगभग चार साल पहले 21 सितंबर 2012 को श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्र राजपक्षे ने इस पहाड़ी पर एक पौधा रोपा था। जो धीरे-धीरे वृक्ष का रूप ले रहा है। भगवान गौतम बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर बौधित्व को प्राप्त किया था। अत: बौद्ध धर्म में इस बोधि वृक्ष कहा जाता है। बौद्ध अनुयाईयों के लिए यह पेड़ श्रद्धा और आस्था का केंद्र है।
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