असिस्टेंट प्रोफेसर के 26 पदों को 30 लाख मे बेचने का आरोप.. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का तथाकथित लिस्ट वायरल… प्रदेश मे मामला गहराया…

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रायपुर। इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में 32 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन रिजल्ट आने से पहले ही 26 उम्मीदवारों की संभावित चयनित सूची पूरे विश्वविद्यालय में घूम रही है और इस सूची में किससे कितना लाख रुपये संभावित चयनित उम्मीदवारों से लिया गया है यह भी दर्शाया गया है, इससे लगता है कि एक बार फिर महात्मा गॉंधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय के तर्ज पर यहाँ भी सहायक प्रोफेसरों के भर्ती में घोटाला हो रहा है। महात्मा गॉंधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय में 31 सहायक प्रोफेसरों के भर्ती में रिजल्ट निकलने के बाद मामला प्रकाश में आया और जांच के बाद तत्कालीन कुलपति डा कुरील को राज्यपाल ने बर्खास्त कर दिया, लेकिन अब इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में रिजल्ट के पहले एक ऐसे संभावित चयनित सहायक प्रोफेसरों की सूची पूरे विश्वविद्यालय में वाटशाप में घूम रही है जिसमें 26 संभावित उम्मीदवारों के चयन में कितने लाख रूपये लिया गया है, यह भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है। इस मामले की जानकारी इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को वाटशाप से मैसेज किया गया तो उसका जबाब कुलपति डा गिरीश चंदेल द्वारा नहीं दिया गया साथ ही फोन भी लगाया गया तो मोबाइल बंद बताया। आखिर महात्मा गॉंधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय जैसा सहायक प्रोफेसरों की भर्ती में इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में भी किया जा रहा है, क्या कुलपति डा गिरीश चंदेल और उनके दलाल यह सब कर रहे हैं या कोई ऐसा है जो कुलपति को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। यह जांच का बिषय है ऐसा भर्ती घोटाल संभावित चयनित सूची को देखकर कर लग रहा है कि पैसे वाले अयोग्य उम्मीदवार सहायक प्रोफेसर बन कर विश्वविद्यालय को डूबाने की कोशिश कर रहे हैं और एक गरीब उम्मीदवार जिसके पास लाखों रुपए न होने के बावजूद योग्यता रखता है उसको लाखों रुपए न देने के कारण अयोग्य मान लिया गया है।
सूत्र से ज्ञात हुआ है कि महात्मा गॉंधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय में 31 सहायक प्रोफेसर की भर्ती हुईं और रिजल्ट आने के बाद आनन फानन में चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइन करा दिया गया, बाद में उसकी जांच होने के पर जब चयनित उम्मीदवारों ने देखा कि मामला राज्यपाल के जानकारी में आ गया है तो हाईकोर्ट से रिजल्ट के अगेंस्ट स्टे लाए और वह नौकरी कर रहे हैं क्योंकि वहाँ भी चयनित सहायक प्रोफेसरों ने लाखों रुपए देकर नौकरी प्राप्त किया था। वही स्थित इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में भी देखने को मिल रही है यहाँ भी रिजल्ट आने के पहले ही सहायक प्रोफेसरों की संभावित चयनित सूची में कौन कितना दिया है उसका पूर्ण रूप से लेखा जोखा लाखों में देखा जा रहा है। क्या यह संभावित चयनित सूची आगामी विश्वविद्यालय के 18 सितम्बर 2024 के बोर्ड बैठक में जो सूची के रिजल्ट निकाले जाएगें उसमें एक रूपता देखी जा सकती है। अगर एक रूपता होगी तो निश्चित रूप से इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा गिरीश चंदेल और उनके दलाल पूरी तरह से लाखों रुपए संभावित सूची के अनुसार वसूली किये है और पूरे भर्ती घोटालों को जन्म दिये है। जबकि 11 सितम्बर 24 को इंटरव्यू खत्म होने के बाद से ही इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में ऐसी चर्चा शुरू हो गई थी कि कुछ विश्वविद्यालय के कुलपति डा गिरीश चंदेल के दलाल उम्मीदवारों से सम्पर्क करना शुरू कर दिया था और बोलियाँ लगनी शुरू हो गई थी और इस 26 उम्मीदवारों की संभावित चयनित सूची से ऐसा लगता है कि कुलपति डा गिरीश चंदेल और उनके दलाल लाखों रुपए उम्मीदवारों से वसूल करने में कामयाब हो गये।
सूत्रों का मानना है कि अभी 32 में 6 संभावित उम्मीदवारों की चयनित सूची सहायक प्रोफेसरों का प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन विश्वविद्यालय के आगामी 18 सितम्बर को होने वाले बोर्ड बैठक से पहले वह 6 संभावित चयनित उम्मीदवारों की भी सूची प्राप्त हो जाएगी और कुलपति डा गिरीश चंदेल बोर्ड की बैठक में इस चयनित सूची को ही असली जामा पहनाने में कामयाब होगे या बोर्ड के सदस्य इस पर किसी तरह की आपत्ति उठाएगे, जबकि इस घोटाले की जानकारी बैठक से पहले बोर्ड के सदस्यों, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री को भी अवगत कराया जाएगा। अगर यह संभावित चयनित सूची की जांच की जाये तो सही पाई जाए तो कुलपति डा गिरीश चंदेल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

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