छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में भगवान ब्रह्मा का इकलौता प्राचीन मंदिर, साल में एक बार लगता है भव्य मेला…

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर को देवी देवताओं का धाम कहा जाता है, बस्तर के रहवासी देवी उपासना के साथ सदियों से भगवान विष्णु महेश और ब्रह्मा की पूजा अर्चना करते आ रहे हैं, वहीं जगत पिता ब्रह्मा भगवान को भी बस्तर के आदिवासी आदिकाल से पूजा करते आ रहे हैं.

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यही वजह है कि छत्तीसगढ़ राज्य में एकमात्र ब्रह्मा जी का मंदिर बीजापुर जिले के मिरतुर नामक ग्राम में मौजूद है, यहां हर साल मेला लगता है, जहां तेलंगाना, उड़ीसा ,आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से ब्रह्मदेव की पूजा करने श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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दक्षिण भारतीय शैली में बनाई गई है मूर्तियां
दरअसल धराशाई हो चुके मंदिर के अवशेष और मूर्तियों की खोज कुछ साल पहले यहां के तहसीलदार ने की थी. यहां ब्रह्मा, विष्णु, महेश की प्राचीन मूर्ति स्थापित है और यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजा पाठ करने आते हैं. ब्रह्मा जी की मूर्ति के साथ विष्णु महेश और गणेश, सूर्य देव की मूर्तियां दक्षिण भारतीय शैली में बनाई गई है, इस मंदिर को देखने पर ऐसा लगता है कि मंदिर तत्कालीन छिंदक नागवंशी राजाओं द्वारा 10वीं या 11 वीं शताब्दी में बनाया गया होगा.

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साल में एक बार लगता है मेला
बीजापुर जिले के भैरमगढ़ तहसील के मिरतुर नामक ग्राम में मौजूद इस मंदिर को आदिकाल में राजा महाराजाओं ने बनाया था, लेकिन यह मंदिर देख रेख के अभाव में धराशायी हो चुकी थी, लेकिन भैरमगढ़ के तहसीलदार रहे विजय शर्मा ने इस धराशाई हो चुके मंदिर के अवशेष और मूर्तियों की खोज की और इससे ग्राम वासियों के सहयोग से बिखरी पड़ी ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य देव की मूर्तियों को विशाल बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाकर स्थापित किया.

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सदियों पुराना है ब्रह्मा जी मंदिर

ग्राम वासियों ने बताया कि साल में एक बार यहां मेला भरता है और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु चारों राज्यों से भगवान ब्रह्मा के दर्शन के लिए आते हैं, जानकार राजेन्द्र वाजपेयी ने बताया कि राज्य और केंद्र के पुरातत्व विभाग को इस जगह का संरक्षण और संवर्धन का दायित्व लेना चाहिए, क्योंकि भारत में राजस्थान राज्य के पुष्कर को छोड़कर ब्रह्मा जी का मंदिर कहीं भी नहीं है और यह गौरव की बात है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में मिरतुर ग्राम में ब्रह्मा जी का यह सदियों पुराना मंदिर है.

संरक्षित किए जाने की है आवश्यकता
लोगों का यह भी कहना है कि इसे संरक्षित कर प्रचार प्रसार करना चाहिए और मूलभूत सुविधाओं को विकसित करना चाहिए, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, पर्यटकों के आने से क्षेत्र के लोग भी व्यापार कर सकेंगे, कालांतर में देखरेख के अभाव में धराशायी हुई इस मंदिर और वैभवशाली मूर्तियों को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है. वहीं ब्रह्मदेव के मंदिर से पर्यटक विश्व प्रसिद्ध ढोलकाल शिखर में स्थापित गणेश जी सहित बैलाडीला की पर्वत श्रृंखलाओं का सौंदर्य भी निहार सकते हैं.

बनाया जाएगा भव्य मंदिर
इधर हाल ही में बीजापुर दौरे पर पहुँचे बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बीजापुर जिले के अधिकारियों से मीटिंग के दौरान उन्हें ब्रह्मा जी के मंदिर की जानकारी मिली है ,जिसे संरक्षित करने के लिए और इस मंदिर को ब्रह्मा जी का भव्य मंदिर बनाने के लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी.

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