सिटी बस योजना पूरी तरह फ्लाप: 20 मे से 14 बसें खराब, मरमत भी भूले ! मेडिकल कॉलेज,मदर चाइल्ड हास्पिटल जाने के लिए 200 से 600 वसूल रहे ऑटो चालक…!
सिटी बस योजना पूरी तरह से फ्लाप साबित हुई है। मेडिकल कालेज रूट पर बार बार बैठकों के बाद भी बस सेवा सामान्य नहीं हो पाई है। ऑटो चालकों की मनमानी से मरीज परेशान हैं। कबाड़ हो चुकी बसों की मरम्मत के लिए शासन से नगर निगम को 80 लाख रुपए मिले, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी बिलासपुर भेजी गईं चार बसों की मरम्मत नहीं हो पाई है।
पुसौर, तमनार, बरमकेला रूट में बसें चलाई जा रही हैं। आपरेटर रूट में बदलाव की मांग कर रहे हैं। शहर में सड़क संकरी होने के कारण बसें चलाना मुश्किल है। मेडिकल कालेज में 650 मदर चाइल्ड हास्पिटल में रोजाना 100 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। वे आटो से जाते हैं तो उनसे 300 600 रुपए तक किराया ले लिया जाता है। इसलिए लंबे समय सिटी बसों को चलाने की मांग उठती रही है।
ऑपरेटर बदलाव की कर रहे मांग: नौ गाड़ियां खराब हालात में खड़ी हुई हैं। आपरेटर जल्द सुधरवाने की बात कह रहे हैं। दो आपरेटर के जिम्मे 3 3 बसें चल रही हैं। तमनार, पुसौर, बरमकेला के लिए बसें चलाई जा रही हैं। लेकिन आपरेटर इस रूट पर बदलाव करने की मांग कर रहे हैं। वह भी नहीं हो पाया है। अभी ग्रामीण इलाकों बस चल रही है। उसमें यात्री नहीं मिलते, सिटी बस में सर्विस नए सिरे से रूट निर्धारित करने के लिए कहा जा रहा है।
जूटमिल से मेडिकल कॉलेज तक चलाएंगे बस कलेक्टर ने चार दिनों पहले निगम के अफसरों को निर्देश दिया हैं कि मेडिकल कालेज और एमसीएच तक सिटी बस को चलाया जाए। एक बस जूटमिल, छातामुड़ा या सारंगढ़ बस स्टैण्ड, मिनी माता चौक, कलेक्ट्रेट के रास्ते मेडिकल कालेज तक चलाई जाएगी। शहर के अंदर सड़कें संकरी होने की वजह से सिटी बसें चल नहीं पा रही हैं। मेडिकल कालेज या एमसीएच जाने के लिए मरीजों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। मरीज या परिजन आटो से मेडिकल कालेज या मर्दर चाइल्ड हास्पिटल में जाता है तो भास्कर रिपोर्टर ने वहां जा कर सामान्य मरीज बन कर आटो वालों से बातचीत की। आटो वालों ने मदर एंड हास्पिटल से शहर तक आने के लिए 300 रुपए लेने की बात कही।
हॉस्पिटल पहुंचने में लगता है ज्यादा चार्ज
मरीज या उनके परिजन ने बताया ढिमरापुर चौक तक जाने 300 रुपए चार्ज लेते हैं। शहर में सुभाष चौक या बस स्टैण्ड तक जाने पर 200 रुपए तक लेते हैं। रात में तो आटो ड्राइवर 400 600 रुपए तक वसूलते हैं। ड्राइवर बताते हैं कि वापस आने पर उन्हें कोई सवारी मिले गारंटी नहीं रहती, इसलिए दोनों तरफ का भाड़ा एक साथ लेते हैं। शेयर आटो में एक यात्री 30 रुपए तय किया है, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। मेडिकल कालेज प्रबंधन के मेडिकल सुपरिटेंडेंट मेडिकल कालेज तक बस चलाने की मांग करते रहे हैं। दो बस के दिनभर में दो से तीन फेरे लगाए तो मरीजों को राहत मिलेगी। एक बार बस चलाई गई। सुबह 8 9 बजे शहर से छोड़ा यात्री नहीं मिले तो वह बंद कर दिया गया।
ऑपरेटर बदलाव की कर रहे मांग
नौ गाड़ियां खराब हालात में खड़ी हुई हैं। आपरेटर जल्द सुधरवाने की बात कह रहे हैं। दो आपरेटर के जिम्मे 3 3 बसें चल रही हैं। तमनार, पुसौर, बरमकेला के लिए बसें चलाई जा रही हैं। लेकिन ऑपरेटर इस रूट पर बदलाव करने की मांग कर रहे हैं। वह भी नहीं हो पाया है। अभी ग्रामीण इलाकों बस चल रही है। उसमें यात्री नहीं मिलते, सिटी बस में सर्विस नए सिरे से रूट निर्धारित करने के लिए कहा जा रहा है।
जल्द आएंगी बसें शहर में चलाएंगे
“कुछ सिटी बसों को बनाने के लिए भेजा गया है। वहां बातचीत हुई है। एक दो दिनों बन कर आ जाने की उम्मीद है। बाकी बयों को भी बनवाएंगे। वहीं, शहर में सिटी बस चलाने के लिए ऑपरेटर से बातचीत हुई है। दिनभर में दो से तीन बार अलग अलग समय चलवाएंगे। कलेक्टर के भी निर्देश हैं।” ऋषि राठौर, प्रभारी, शहरी सार्वजनिक यातायात सोसाइटी
