बजट में कटौती: मनरेगा का बजट घटाया, एक तिहाई फंड मिलेगा, चुनावी सीजन मे जनप्रतिनिधियों पर भारी दबाव…
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में इस साल बजट में काफी कटौती कर दी गई्ई है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए आमतौर पर मिलने वाले बजट का एक तिहाई बजट ही स्वीकृत किया जाएगा। 6 माह के लिए जिले को मनरेगा से सालाना करीब 16 करोड़ रुपए कार्य स्वीकृति करने की अनुमति मिलती है। दरअसल केंद्र और राज्य सरकार 6 6 माह कर इस स्कीम में फंड देती है।
इस साल केन्द्र सरकार से जो स्वीकृति मिली है, वह 16 करोड़ रुपए की मिली है। चुनाव के दृष्टिकोण से ऐसा फैसला सरकार द्वारा लेने की चर्चाएं है। हालांकि इसके पहले कभी ऐसा देखने को नहीं मिला। चुनावी सीजन में ज्यादा से ज्यादा कार्य की स्वीकृति कराने के साथ ही विधायकों का दबाव इस बात लेकर है कि मैदानी इलाकों में अधिक से अधिक काम भी हो, ताकि इसका फायदा मिल सके, इसलिए स्वीकृतियां ज्यादा ली जा रही हैं।
अभी हर जनप्रतिनिधियों लगातार दबाव भी है। गर्मी के दिनों में तालाब से लेकर चबूतरा, सीसी रोड, पौधरोपण, लघु सिचांई कार्य, भूमि विकास कार्य जैसे कई तरह कार्य मनरेगा में किया जाता है। मनरेगा में 100 दिनों का रोजगार देना
जरूरी होता है। बजट में राज्य सरकार का 90 फीसदी हिस्सा होता है, लेकिन 100 दिनों से अधिक 150 दिनों तक रोजगार दिया जाता है, तो उसके लिए केन्द्र सरकार बजट देती है। अधिकांश हिस्सा केन्द्र सरकार बजट को जाता है। पिछले साल तक 17 हजार लोगों को 100 से अधिक दिनों का रोजगार दिया गया है।
मांग आधारित स्कीम है, फंड डिमांड की जाएगी
जिला पंचायत के अफसरों के अनुसार यह स्कीम मांग आधारित है। अभी रोजाना 25 हजार से अधिक मजदूर इस स्कीम से जुड़ रहे हैं। बरमकेला और सारंगढ़ को मिला दें तो वह आंकड़ा 50 हजार से अधिक का चला जाता है। इसमें यदि मजदूरों को काम के लिए डिमांड आती है, तो इसका प्रस्ताव बनाकर फिर से सरकार के पास भेजा जाएगा। इसकी स्वीकृति ली जाएगी, क्योंकि इसमें मजदूरों को काम देने से इंकार नहीं कर सकते हैं। हालांकि इसमें कार्यों की मंजूरी देने पर इफेक्ट पड़ने की बात कही जा रही है।
