केलो नहर से पानी देने की मांग: सैकड़ों की तादात मे कलेक्टोरेट पहुंचकर किसानों ने सौंपा ज्ञापन, पुसौर और बरमकेला की हालत गंभीर….
नेतनागर में नहर बनाने का विरोध लगातार हो रहा है। सोमवार को नेतनगार के किसानों ने पदयात्रा करके कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस पदयात्रा में किसानों के साथ बड़ी संख्या में बीजेपी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए। पदयात्रा दोपहर साढ़े 12 बजे गांवों से निकलकर शहर के काशीराम चौक, कबीर चौक, जूटमिल होते शाम साढ़े 4 बजे रायगढ़ पहुंची।
नेतनागर के किसानों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंकर खरीफ के साथ रबी में केलो नहर से पानी देने की मांग के साथ केलो नहर की ऊंचाई को भी बढ़ाने की मांग की है। नेतनागर से आए 10 लोगों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात की है, इसमें प्रतिनिधिमंडल ने गांवों में सर्वे कराने की बात उठाई है। वर्ष 1974 75 में जो सर्वे हुआ था, उसी के आधार पर नहर निर्माण करने के लिए कहा है। इस दौरान बड़ी संख्या बीजेपी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल के अलावा गांवों के लोग भी शामिल हुए।
किसान आंदोलन की तर्ज पर वहां के किसानों ने सोमवार को पदयात्रा के साथ ट्रैक्टर में बैठकर वहां पर लोगों से मिलने पहुंचे थे। इधर कलेक्टर ने आवेदन का परीक्षण कराने का आश्वासन दिया है। इधर नेतनागर के किसान लल्लू सिंह ने बताया कि उनका आंदोलन मंगलवार से गांवों में चलता रहेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। वे अलग अलग मांगों को लेकर कलेक्टर से मुलाकात की है और राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नाम
पर ज्ञापन भी सौंपा है।
प्रशासन का तर्क भू जल के उपयोग से गिर रहा जल स्तर जिला प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी करके कहा हैं कि वर्षा आधारित कृषि में सिंचाई की समुचित व्यवस्था बहुत आवश्यक है, ताकि फसलों को आवश्यकतानुसार मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जा सके। सिंचाई के लिए अधिकतर भू जल पर ही निर्भरता होती है, लेकिन लगातार भू जल का दोहन और सिंचाई के साथ अन्य प्रयोजनों के लिए उनका उपयोग होने से भू जल स्तर में गिरावट आ रही है। इससे गर्मी के मौसम में कई स्थानों में पेयजल की समस्या बड़े पैमाने पर उभरकर सामने आ रही है, जिससे निपटने में ऐसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं, जो दीर्घकाल तक भू जल को रिचार्ज करने का स्थायी समाधान दे। जिले में केलो परियोजना और उससे निर्मित नहरों का जाल इस दिशा में कारगर साबित होंगे। सिंचाई, पेयजल और निस्तार के साथ ग्राउंड वाटर रिचार्ज जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्य की पूर्ति के लिए सिंचाई विभाग केलो परियोजना का काम पूरी तेजी से पूर्ण करवाने में लगा है।
पुसौर और बरमकेला में स्थिति खराब
कार्यपालन अभियंता पीएचई परीक्षित चौधरी ने बताया कि कुछ समय में पुसौर व बरमकेला में भू जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। इस वर्ष विकासखंड पुसौर में औसत भू जल स्तर 26.5 मी. व अधिकतम भू जल स्तर 85 मीटर तक जा चुका है। विकासखंड बरमकेला में औसत जल स्तर 28.6 मी. व अधिकतम भू जल स्तर 135 मी. तक जा चुका है। भू जल स्तर गिरने से विकासखंड पुसौर में लगभग 118 हैण्डपंप व बरमकेला में 400 हैण्डपंप बंद है। उन्होंने कहा
कि इन विकासखंडों में भू जल स्तर की वृद्धि के लिए सतही स्त्रोत आधारित सिंचाई की व्यवस्था को बढ़ावा देना जरूरी है। इससे सिंचाई के लिए भू जल का उपयोग कम होगा व भू जल स्तर में वृद्धि होगी।
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