रायगढ़:बिना कार्य किये पूर्व के कार्य को दिखा राशि का किया गबन ! सचिव व सरपंच के घोटाले की जांच में की जा रही लीपापोती…

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रायगढ़। पंचायती राज की स्थापना सत्ता का विकेंद्रीकरण था साथ ही निचले स्तर पर फैसले लेकर ग्राम स्वराज लाना था लेकिन कतिपय चुने हुए जनप्रतिनिधि ने पंचायत सचिव से मिलकर भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी लिखी जो कि लालकिले से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्वीकारोक्ति को भी झुठला रही है। पूरी की पूरी आबंटित राशि का ही गबन सरपंच सचिव ने मिलकर किया है। केंद्र सरकार द्वारा पंचायतों को आर्थिक सुदृण बनाने चौदहवें व पंद्रहवे वित्त आयोग के माध्यम से पंचायत को सीधे राशि पंचायत के खाते में अंतरित की। जिसे ग्राम पंचायत बिरसिंघा के सरपंच बसंती भगत एवं सचिव रमेश पटेल ने बिना कार्य किये पूर्व के कार्य को दिखा गबन कर बंदरबांट किया गया है।

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पूर्व में अन्य मद से स्वीकृत बोर खनन और निजी व्यय से पंप स्थापना को ग्राम पंचायत के मद से लगाना दिखाया और राशि हड़प कर ली। बोर खनन और पम्प स्थापना की जमीनी हकीकत का पता लगाने संवाददाता द्वारा ग्राम बिरसिंघा से ग्राउंड लेबल रिपोर्ट तैयार कर मामले को उजागर किया। कुल 11,86,311 की चौदहवें वित्त आयोग की राशि का गबन सचिव रमेश कुमार पटेल एवं सरपंच बसंती भगत ने मिलकर किया है। पूर्व में अन्य मद से खोदे गए बोर को वर्ष 2021-22 में बोर खनन और पम्प स्थापना व्यय दिखाकर राशि डकार ली है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीरेंद्र राय ने गबन के आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया जिसने द्वारा जांच के लिए अन्य मद से खनित बोर के रिकार्ड देखने के बजाय ग्रामवासियों से बयान दर्ज किया गया और जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है।

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बिना जीएसटी बिल से आहरण

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पंप खरीदी के भुगतान किए गए सभी बिल बिना GST के लगाए गए हैं। जबकि केंद्र सरकार से आवंटित राशि के खर्च में जीएसटी बिल पर ही भुगतान अनिवार्य है। ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव द्वारा प्रमाणित और मंजूरी के बाद संदाय और अभिस्वीकृति से भुगतान किया गया है।

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अवलदल घर के पास बोरिंग नही

चौदहवें वित्त की राशि से अवलदल घर के पास बोर का खनन और बोरिंग स्थापना गया और राशि का भुगतान 16.12.2021 को साहू इंजीनियरिंग व साहू इलेक्ट्रिकल को किया गया है। जबकि अवलदल के अनुसार बोर 4-5 साल पहले खनन किया गया है और बोरिंग स्थापना भी वर्तमान में नहीं है।

विधायक निधि से खोदा गया बोर

विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से बंगला के पास वर्ष 19-20 में बोर का खनन किया गया जिसका भुगतान भी 20.09.2019 को किया जा चुका है।उसी बोर को फिर से कागजो में दिखाकर भुगतान 14वें वित्त आयोग की राशि से दिनांक 16.12.2021 को किया गया जो कि गबन के मामले को प्रमाणित करता है । जांच दल के द्वारा मामले को रफा दफा करने ग्रामवासियों से बयान लिया जा रहा है।और जांच रिपोर्ट भी उसी बयान के आधार पर बनायी गयी है। और कार्य को होना बताया जा रहा है।

बिल की बजाय एस्टीमेट कोटशन वाउचर पर किया भुगतान

ग्रामवासियों के अनुसार बोर खनन और पम्प स्थापना पूर्व के बोर को वर्ष 21-22 में दिखाकर शासकीय राशि का बंदरबांट किया गया है। ग्राम सचिव रमेश पटेल ने जो बिल भुगतान की प्रमाणित फोटोकापी दी है वह बिल की बजाय एस्टीमेट कोटशन वाउचर है और उसे ही आधार मानकर बिल भुगतान कर दिया गया है। साहू इंजीनियरिंग एवं साहू इलेक्ट्रिकल्स के नाम के बिल बाउचर में एक ही संपर्क नंबर है। जबकि भुगतान भी फर्म की बजाय व्यक्तिगत नाम से किया गया है।

चौदहवें एवं पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि की नहीं होती मॉनिटरिंग

केंद्र सरकार द्वारा आबंटित 14वे एवं 15वें वित्त आयोग की राशि का आबंटन सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाता है।जिसे सरपंच सचिव के द्वारा बिल के माध्यम से पूर्व में पंजीकृत सप्लायर के खाते में ट्रांसफर की जाती है। नियमानुसार उक्त मद की राशि मे से 50,000 से अधिक की राशि व्यय करने के लिए इस्टीमेट और मूल्यांकन आवश्यक है।लेकिन जनपद पंचायत क्षेत्र की किसी भी पंचायत में यह नियम का पालन नहीं किया जाता। राशि सीधे सप्लायर के खाते में PFMS के माध्यम से डाल दी जाती है।जिसका व्यय से संबंधित ब्यौरा में केवल बिल ही प्रस्तुत किया जाता है। इस्टीमेट, MB रिकार्ड नही कराने से मनमर्जी से सरपंच सचिव के हस्ताक्षर मात्र से राशि का ट्रांसफर हो जाता है।

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