संभावना: मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ मे भी आएगा चीता ! उत्सुकता के साथ दिखी जिज्ञासा, देश में चीता युग की शुरुआत…
मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में आठ चीता लाए गए हैं। इससे देश में चीता युग की शुरुआत हुई है। ऐसे में अब अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में इस प्रजाति के नजर आने की उम्मीद बढ़ गई है।
शनिवार को सुबह से यहां के वन्य प्राणी और विशेषज्ञों के बीच आपस में चर्चा होती रही। इसके अलावा चीता की एक झलक पाने के लिए पूरे समय टीवी के सामने डटे रहे।
भारत सरकार ने 1952 में चीता प्रजाति को विलुप्त घोषित कर दिया था। एक तरह से लोग इस प्रजाति को भूल चुके थे। जब कभी इसे लेकर चर्चा होती जुबा पर यही बातें आती की यह प्रजाति अब कभी देखने को नहीं मिलेगी। इस बीच मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान में इन्हें लाने की पहल से एक बार वन्य प्राणी प्रेमियों के बीच उत्साह है और यही सोच रहे हैं कि जल्द ही चीता देश के सभी प्रमुख राज्यों में नजर आएंगे। इसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में टाइगर रिजर्व से लेकर राष्ट्रीय उद्यान हैं। अचानकमार टाइगर रिजर्व भी अपनी खूबियों की वजह से जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, बाइसन से लेकर लगभग सभी प्रजातियों के वन्य प्राणी हैं। वन्य प्राणियों को उम्मीद है कि जिस घने जंगल में इतनी तरह के वन्य प्राणी हैं, वहां चीता भी आ सकता है। हालांकि चीता के लिए एटीआर की आबोहवा कितनी उपयुक्त है, यह तो रिसर्च का विषय है। पर मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय में इनका आना बेहतर संकेत है। जितनी उत्सुकता वहां वन्य प्राणयों में थी। उतना ही उत्साह शहर के वन्य प्राणी प्रेमियों में नजर आया। टीवी स्क्रीन पर ही सही पर 75 साल बाद चीतलों को देखना किसी रोमांच से कम नहीं था। चीता को पिंजरे से छोड़ने से लेकर उनके क्वांरटाइन सेंटर में हलचल को देखने के लिए उत्साहित नजर आए।
उत्सुकता के साथ दिखी जिज्ञासा
देश में चीता की वापसी के बाद अब वन्य प्राणी प्रेमियों में इस बात को लेकर हलचल शुरू हो गई है कि अब किस राज्य के किस राष्ट्रीय उान में इसे लेकर पहल हो सकती है। हालांकि अचानकमार टाइगर रिजर्व का इतिहास जानने का प्रयास करते हैं। वन अफसरों से लेकर वन्य प्राणियों पर लंबे समय से काम करने वाले विशेषज्ञों से यह जानकारी लेने की कोश्शि की गई क्या अचानकमार में कभी चीता हुआ करते थे। हालांकि इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वन अफसर भी टाइगर रिजर्व का इतिहास खंगाल चुके हैं। लेकिन उन्हें इस तरह की जानकारियां नहीं मिली है।
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