ओपी चौधरी ने फिर जीता दिल: प्रवेश करने पे रोकने वाले गार्ड की ओपी ने थपथपाई पीठ ! नालंदा को बनाने वाले कलेक्टर ओपी चौधरी को प्रवेश से रोके जाने का अनोखा मामला..ओपी के व्यवहार को देखकर आप भी कहेंगे वाह !
रायगढ़। कलेक्टर रहते नालंदा परिसर का निर्माण करने वाले ओपी चौधरी को कुछ वर्षो बाद छात्रों के आग्रह पर पुनः नालंदा परिसर गए। प्रवेश करने के दौरान मौजूद सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हे रोकते हुए पूछा किनसे मिलना है। तब ओपी चौधरी ने गार्ड से शालीनता पूर्वक मुस्कुराते हुए कहा अंदर जाइए बताइए कि ओपी चौधरी जी मिलने आए हैं। अंदर जाने के बाद गार्ड जब वापस आया तब वह उनके सामने निरुत्तर खड़ा हो गया। सिक्योरिटी गार्ड को पता चल चुका था कि इस शिक्षा के इस गढ़ को गढ़ने वाले असली निर्माता तो ओपी चौधरी ही हैं। जैसे ही छात्रों से मिलकर ओपी बाहर आए तो पीछ से आकर गार्ड ने शर्मिंदा होते हुए कहा कि सर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मैं आपको पहचान नहीं पाया। इस पर ओपी चौधरी जी मुम्कुराकर गार्ड की पीठ थपथपाये हुए कि आपने अपनी जिम्मेदारी बखुबी निभाई है। आप अपनी ड्यूटी बहुत अच्छे से कर
रहे हैँ। तुम्हारे घर मे सब ठाक हैं न ऐसा कहते हुए ओपी चौधरी वहां से निकल गए।
वीआईपी कल्चर के मध्य ऐसी सादगी से ओपी चौधरी ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। इससे मिलता जुलता वाकया तीनसाल पहले बारसूर नवोदय विद्यालय के दौरान घटित हुआ। वहां भी सिक्योरिटी गार्ड ने ओपी जी को गेट पर प्रवेश के दौरान रोकते हुए कहा कि अंदर एडिशनल कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर मौजूद हैं अभी आप अंदर नहीं जा सकते। किसी ने गार्ड के कान में बताया कि ये दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी है। तब उन्हें अंदर जाने दिया गया। यह इत्तफाक ही था कि अंदर मौजूद अधिकारी भी बच्चों को ओपी चौधरी द्वारा किए गए कार्यों को बताकर प्रेरित कर रहे थे।
उस दौरान भी ओपी के बाहर आते ही गार्ड ने माफी मांगने का प्रयास किया। लेकिन ओपी ने गार्ड के दोनों हाथों को पकड़कर निश्चार्थ भाव से कर रहे ड्यूटी की सराहना करते हुए पीठ थपथपाई। ऐसी घटनाएं ही नेतृत्व के प्रति आदर सम्मान का भाव पैदा करती है। ओपी चौधरी की सरल हृदयता उन्हे वायरल नेता के रूप में स्थापित करती है। हर समय कुछ अच्छा करने की चाह ही उनके राजनैतिक सफलता का राज भी
है। नालदा परिसर म॑ मोजूद लाइब्रेरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। लाखों युवा यहां देखे गए सपनो को हकीकत में तब्दील करते है। नालंदा परिसर की लाइब्रेरी यवाओं के लंबी छलांग की गवाह बन गई। रायपुर कलेक्टर की पदस्थापना के दौरान इसका निर्माण ओपी चौधरी के कार्यकाल की देन है। नक्सल क्षेत्र में पदम्थापना के दौरान एजुकेशन सिटी को विश्व की बेहतरीन उपलब्धियों में शामिल किया गया था। उनके कार्यकाल में 52 हजार छात्रों हेतु हास्टल का निर्माण किया गया। प्रदेश के जनता ओपी चौंधरी के अंदर नेतृत्व की अपार संभवनाए तलाश रहे है।
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