रायगढ़: “आत्महत्या करने वाले मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं” डॉक्टर प्रकाश चेतवानी….आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दौरान कैदी, कैड्टस और छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दी गई ट्रेनिंग….

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रायगढ़/ हर अस्थायी समस्या का एक स्थायी समाधान होता है जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते है, वह मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं। दर्द का इलाज किया जा सकता है और जीवन मे छाई निराशा को एक नई दिशा दी जा सकती है। जन मानस में आत्महत्या जैसे गलत कदम लेने से रोकने और इसके प्रति जागरुकता उत्पन्न करने हेतु विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह मनाया जा रहा है। इस बार इसकी थीम “गतिविधि के माध्यम से आशा का संचार करना है”

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इस सम्बंध में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रकाश चेतवानी ने जानकारी देते हुए बताया: “आत्महत्या का प्रमुख कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ रहना है। अक्सर लोग अपनी मानसिक बीमारियों को छिपाते हैं और खुलकर उस पर बात नहीं करना चाहते हैं। अत: किसी भी परिस्थिति में अकेले ना रहें। यदि किसी को कुछ समस्या है तो अपने परिवार वालों या करीबी से बात करे, उन्हें अपनी समस्या बताएं और समस्या का समाधान खोजें। हमेशा सकारात्मक विचार मन मे लाने का प्रयास करें। आपके करीब ऐसे कई लोग होंगे जिन्हें आपकी जरूरत है। मौत का सामना करने के बजाए अपनी हिम्मत और साहस का उपयोग जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए कीजिए।”

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केशरी ने बताया: “अपने दैनिक गतिविधियों में से कुछ समय निकालकर खुद के लिये समय दें,योगाभ्यास करें, खानपान में सुधार करें और पर्याप्त नींद लें। मानसिक अस्वस्थता की स्थिति हो तो घबराएं नही, जिला अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक के माध्यम से मानसिक रोगियों को निःशुल्क परामर्श व उपचार दिया जाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन नंबर (1-800-273-8255) में कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैंI”

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जब छात्रा ने मुख्यमंत्री से पूछा – आपकी मुस्कुराहट का राज क्या है

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जिले में आत्महत्या रोकथाम और तनाव प्रबंधन के लिए 7-12 सितंबर तक विशेष सप्ताह मनाया जा रहा है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जनजागरूकता के लिए विविध कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित किये गए।

आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दौरान जिला जेल में 250 कैदियों को तनाव रहित जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया जिसके माध्यम से कैदियों को परेशान नहीं होने और अत्यधिक तनाव की स्थिति में किसी साथी से बात करने की सीख दी गई।

आत्महत्या रोकथाम दिवस यानि सितम्बर 10 को संत टेरेसा स्कूल के 12वीं के छात्रों को आत्महत्या को कैसे रोकें इसे स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिखाया। टीम ने बच्चों को अति महत्वाकांक्षी न होने और मित्रों-पालकों के प्रति इमानदार होने की बात कही जिससे छात्र किसी भी तनाव की स्थिति में उबर सकते हैं।

ओपी जिंदल स्कूल में 550 से अधिक एनसीसी कैड्ट्स जो यहां राष्ट्रीय इनटिग्रेटेड कैंप में शामिल होने आए हैं, उनके साथ आत्महत्या रोकथाम के ऊपर कार्यशाला हुई। कैडेट्स को तनाव दूर करने को लेकर कई टिप्स स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दिए जिसमें दोस्तों-परिजनों से बात जारी रखना , अपनी समस्या शेयर करना। मेडिकल कॉलेज प्रांगण स्थित शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय के छात्रों के लिए आत्महत्या रोकथाम विषय पर सेमिनार भी होगा।

डिजिटल युग में संवाद करना जरूरी

मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर व नर्सिंग अधिकारी अतीत राव ने इस सप्ताह कई वर्कशाप लिए और लोगों को तनाव युक्त जीवन अपनाने के लिए कई युक्तियां बताई। उन्होंने कहा: ” डिजिटल युग में हर हाथ में सेलफोन है और एक-एक कोने में सब बैठे हैं। आपस में बातचीत जरूरत के लिए ही हो गई है। संवादहीनता के कारण लोग एकतरफा ही सोचते हैं। यही एकाकीपन है और इसमें ही थोड़ी सी बात का बुरा मानकर लोग बड़े कदम उठा लेते हैं ऐसे में संवाद करना बेहद जरूरी है। कैदियों में निराशा के भाव अधिक होते हैं और यही निराशा कई बार आत्महत्या के कारणों में बदल जाती है। इसलिए हमने कैदियों को चुना और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए गतिविधियों के माध्यम से संदेश दिया। जो हो चुका है उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन जो होने वाला है उसे हम बिलकुल सकारात्मक दिशा में बदल सकते हैं। इसी तरह 12वीं के छात्र और एनसीसी के कैडेट्स जो युवा हैं और एक सुनहरा भविष्य उनके पास है लेकिन आशातीत सफलता नहीं मिलने पर वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। ऐसे बच्चे जो अचानक अलग-थलग और थोड़ा विचित्र व्यवहार करे उसकी पहचान करने के लिए सभी को समझाया ताकि समय रहते उसकी मदद की जा सके।“

यह हैं एन.सी.आर.बी. के आंकड़े

एन.सी.आर.बी. (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) 2021 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 1 लाख लोगों में 26.4 लोग आत्महत्या करते हैं जबकि पूरे भारत में 1 लाख की आबादी पर यह औसत 12 है। छत्तीसगढ़ की यह संख्या राष्ट्रीय औसत के दोगुने से भी ज्यादा है। इसको कम करने के लिए ही आत्महत्या रोकथाम दिवस और सप्ताह मनाया जाता है और लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी आत्महत्या रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जा रहे हैं जिसके क्रम में सरकार द्वारा स्पर्श क्लिनिक की स्थापना की गयी है। इन क्लीनिकों के माध्यम से आत्महत्या का प्रयास करने वाले एवं अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों का उपचार किया जा रहा है और उनको एक बेहतर जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है।

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