सारंगढ़ ब्रेकिंग: “सारंगढ़ तब जिला बनिस जब बिलाईगढ़ वाला मन साथ दिन…” मुख्यमंत्री के इस बयान से सारंगढ़ के जनमानस पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव ! “सारंगढ़ और बिलाईगढ़ दोनो को मिलाकर जिला बना है, प्रशानिक दृष्टि से जहाँ उचित लगेगा वहाँ विभागों का होगा बंटवारा” ने छिढ़का जले पर नमक……
जगन्नाथ बैरागी
सारंगढ़ बिलाईगढ़: सारंगढ़ जिला की मांग 1950 से जब यह मध्य्प्रदेश उससे पहले सी पी बरार का हिस्सा था तबसे की जा रही है।आज 72 साल बाद सारंगढ़ जिला बन पाया। कई महापुरुषों ने जिला निर्माण के लिए संघर्ष किया, नागपुर, भोपाल रायपुर का चक्कर लगाया,बहुत से बुजुर्ग आज स्वर्ग सिधार चुके हैँ, कुछ साथी अभी भी बचे हैँ। “लेकिन सारंगढ़ तब जिला बनिस यह बिलाईगढ़ वाला मन सहमति दिस ”
मुख्यमंत्री के इस बयान ने सारंगढ़ की जनता को खुशी के माहौल मे गमजदा कर दिया है। सारंगढ़ के चौक चौराहों से लेकर गांव के खेत खलिहानो तक लोगों मे सारंगढ़ जिला निर्माण मे योगदान देने वाले जननायको के प्रयास को अपमान की नजर से देखा जा रहा है। लोगों के अनुसार एक तो सारंगढ़ के नाम मे बिलाईगढ़ जोड़ कर ऐसे ही सारंगढ़ की प्रतिष्ठा मे कमी की गयी वो क्या कम था की अब प्रदेश के मुखिया स्वयं लाखों के भीड़ मे मंच से सम्भोधन करते हुवे कह्ते हैँ की सारंगढ़ तब जिला बनिस जब बिलाईगढ़ वाला मन सहमति दीन ! इसके क्या मायने निकाला जाये? क्या हमारे पूर्वज महापुरुषों की मांग और संघर्ष और वर्तमान जनप्रतिनिधियों का कोई मोल नही? क्या मुख्यमंत्री की नजर मे अगर मोल है तो सिर्फ बिलाईगढ़ के जन और जनप्रतिनिधियों का जिन्होंने कभी आज तक जिला की मांग किया ही नही! शायद हां, इसलिए मुख्यमंत्री ने चंद्रदेव राय को भी सबके सामने बधाई दिया और कहा कि चंद्रदेव राय और बिलाईगढ़ की जनता के समर्थन से सारंगढ़ जिला अस्तित्व मे आया है। बहरहाल ये मुद्दा अभी सारंगढ़ मे गरमाया हुवा है।

क्या सारंगढ़ मे नही होगा सभी मुख्यालय?
लोग स्वाल उठा रहे हैँ कि सारंगढ़ के जनप्रतिनिधि जहाँ अंचल के जनता को विश्वास दिलाते फिर रहे थे की सारंगढ़ मे सभी विभाग का कार्यालय होगा। लेकिन मंच मे मुख्यमंत्री के बयान से जनता की भावना को जरूर ठेस पहुंची क्यूंकि मुखिया ने कहा
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला सारंगढ़ और बिलाइगढ़ को मिलाकर जिला बना है ,अलग अलग कार्यालय को प्रशानिक दृस्टि से उचित होगा वहीं खोला जाएगा इस बात का विश्वास मै दिला रहा हुं। इस बयान से कहीं सारंगढ़ नेताओं कि चुप्पी जनता के मन मे नासूर ना बन जाए, इसके लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं को आगे आकर अपना पक्ष रखना पड़ेगा।

कांग्रेसी नेताओं को करना पड़ सकता भारी विरोध का सामना –
अगर बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव राय अपने मंसूबे मे कामयाब होकर विभागों को बिलाईगढ़ ले जाने मे सफल हो जाते हैँ तो कांग्रेस एक सारंगढ़ जिला बनाने का फायदा पहुंचने के बजाय अधिक हानि उठानी पड़ेगी इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता। इसके लिए बड़े धड़े को आगे बढ़कर मुख्यमंत्री के समक्ष जनमानस कि भाव को रखना ही होगा वरना जो विद्रोही स्वर बरमकेला सरिया मे उठ रही है वो सारंगढ़ मे भी उठ सकती है।
सरिया बरमकेला के जनता ने जलाया मुख्यमंत्री का पुतला ? –
सूत्रों की माने तो बिलाईगढ़ मे विभागों की बात मुख्यमंत्री के मुख से सुनते ही अपनी आशंकाओ को सत्य प्रतीत होते देख सरिया बरमकेला वासियों का गुस्सा फुट पड़ा। गुस्सा इतना की जिस मुख्यमंत्री को कभी सर आँखों पर बिठाते थे आज उनके बयान से पुतला दहन पर भी उतर आये। अगर बिलाईगढ़ मे कोई भी मुख्यालय दिया गया तो बरमकेला, सरिया डोंगरीपाली के सुदूर क्षेत्रो के आम जनता को लगभग 80 से 90 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे वर्तमान सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधियों के प्रति विपक्ष मामला को तुल देने मे लगा है और सरिया बरमकेला के आम गरीब जनता को सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के नुकसान को गिना रहा है उसमे और हवा मिलेगी और विरोध भयंकर रूप भी ले सकता है। और सारंगढ़ जिला बनाने का फायदा कांग्रेस नही उठा पाएगी। और ये विरोध सारंगढ़ मे भी उठेगा क्यूंकि उदाहरण स्वरूप गोडम को रायगढ़ तय करने लगभग 40 किमी लगता है लेकिन बिलाईगढ़ मे मुख्यालय तय करने मे दूरी ज्यादा लगेगी ऐसा ही हाल बाकी गांव का भी होगा पूर्वी क्षेत्र की जनता को भी दिक्क़तों का सामना करना पड़ेगा। अतः कांग्रेस के नेताओं को दूरगामी नतीजे को देखनी चाहिए वरना उनका जनाधार कमजोर पड़ेगा।
धनसीर, सलिहा से बलौदा बाज़ार और सारंगढ़ की दूरी मे ज्यादा नही है अंतर-
सारंगढ़ के खेलभांठा मंच से मुख्यमंत्री को सम्बोधित करते संसदीय सचिव और बिलाईगढ़ विधायक ने धनसीर ,सलिहा को सुदूर अंचल बताते विभागों की मांग की है अगर देखा जाए तो बालौदाबाजार और सारंगढ़ की दूरी मे ज्यादा अंतर नही है। धनसीर से बलौदा बज़ार जहा 46 किमी है वहीं सारंगढ़ लगभग 53 किमी है। लेकिन अगर बिलाईगढ़ मे मुख्यालय दिया गया तो सरिया डोंगरीपाली को लगभग 80 से 100 किमी की दूरी भी तय करनी पड़ेगी।
सारंगढ़ के कांग्रेसी नेताओं को रहना पड़ेगा सक्रिय –
सारंगढ़ के कांग्रेसी नेताओं ने सारंगढ़ को जिला बनाने मे जितना मेहनत किया अभी तक किसी भी पार्टी ने नही की थी जिसका पुरुस्कार जनता ने उन्हे नगरपालिका चुनाव मे एकतरफा जिताकर दिया है। विधायक और अरुण मलाकार के साथ सभी कांग्रेसी नेताओं के समर्पण का जनता ने तहे दिल से स्वागत किया था और उन्हे नगरपालिका चुनाव मे भारी मतों से जीत दिलाई थी। अब यहाँ जिला बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती जनता के विश्वास पर खरा उतरने को होगा क्यूंकि अगर सारंगढ़ से विभाग बाहर गये तो सरिया बरमकेला के साथ् सारंगढ़ के जनता का कोप भाजन बनना पड़ेगा जो की कांग्रेस के सेहत के लिए सही नही होगा। क्यूंकि सारंगढ़ जिला का असतित्व ही सारंगढ़, बरमकेला की जनता को रायगढ़ की दूरी से निजात दिलाकर जिला मुख्यालय से सारंगढ़ की जनता की दूरी को कम करना था।
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