रायगढ़। रायगढ़ जिले की सड़कों के हालात की स्थिति किसी से छिपी नहीं वही जिले के लोग अब सड़क मार्ग से आवागमन करने से भी डरने लगे हैं, जिले का एक भी ऐसा मार्ग नहीं जहां की सड़कें देख कर उसकी तारीफ की जा सके, आज की स्थिति में इन्ही जर्जर सड़को की वजह से यहां सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा देखा जा रहा है। हर दूसरे से तीसरे दिन जर्जर सड़क की वजह से बेगुनाहों की होने वाली मौतों की खबरे अक्सर अखबारों की सुर्खियां बनती रही है।


पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि शहर के बाहरी क्षेत्र के उर्दना, तराईमाल, तमनार के लोगों ने सड़क पर उतरते हुए जर्जर सड़क के निर्माण के लिए आंदोलन कर चुके, यहां तक कि पिछले दिनों तमनार के एक किसान के द्वारा जर्जर सड़क से त्रस्त होकर अनोखे अंदाज में इसका विरोध दर्ज किया गया और उसने सड़क को ट्रेक्टर से जोत कर उसमें धान के बीज तक का छिड़काव कर दिया गया। मगर इन सब के बावजूद न तो हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधी और न ही जिला प्रशासन को इन सब आंदोलन का रति भर फर्क हुआ। जिलेवासियों का अच्छी सड़क का सपना एक सपना बन कर रह गया है। शहर के अंदर कोस्टा पारा, पंचधारी रोड,मालथक्का, बोईरदादर की सड़क पूरी तरह से खराब हो चुकी है। कई जगहों पर घुटने भर के गड्ढे बन चुके हैं। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले शहर के भीतर कई जगहों पर निगम द्वारा पैच वर्क अभी काम किया गया है। लेकिन यह सुधार कार्य बस थूक पालिश है, जो कुछ दिनों के बाद उखड़ जाएगी।
शहर के लोगों ने बताया कि शहर से लेकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उनमें एक उम्मीद जगी थी कि अब रायगढ़ जिला विकास की नई इबारत लिखेगा, आम जनता को मूलभूत समस्याओं के लिए आवाज मुखर नही करनी पड़ेगी, जिले की चारों दिशाओं की सड़को को पुनः निर्माण होगा, परंतु कांग्रेस सरकार के 3 साल गुजर जाने के बावजूद आज सड़कों की हालत पहले से कहीं और ज्यादा बदतर हाल में पहुंच गई है। आये दिन सड़क दुर्घटना में लोगों की मौत हो रही है। शहर के लोगों ने यह भी बताया कि शहर सरकार के द्वारा शहर को सुंदर बनाने की दिशा में मुख्य मार्गों में पिछले दिनों तिरंगे नुमा लाइटिंग लगाया गया है, निसंदेह ये पहल बहुत अच्छी है। परंतु जब शहर के अंदर की सड़के ही खराब है तो ये लाइट का क्या औचित्य।
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