बिलाईगढ़। सुबह 6 बजे उठकर घर के काम, आंगन की सफाई, नाश्ता तैयार करना और फिर खेत में मेहनत करना—28 वर्षीय सुमित्रा बाई की यही रोज़मर्रा की दिनचर्या थी। लेकिन कुछ समय से खेत से लौटने के बाद बच्चे को गोद में उठाने, घर की सीढ़ियां चढ़ने और सामान्य काम करने में भी उनकी सांस फूलने लगी थी। शरीर में इतनी कमजोरी महसूस होती कि बिस्तर से उठने का भी मन नहीं करता था।
सुमित्रा को लगा कि अधिक काम करने से थकान हो रही है, लेकिन एक दिन गांव की मितानिन जानकी दीदी ने उनकी पीली हथेलियां और सफेद नाखून देखकर तुरंत आयुष्मान आरोग्य मंदिर चलने की सलाह दी। वहां एएनएम अनुराधा ने हीमोग्लोबिन की जांच की तो पता चला कि सुमित्रा का हीमोग्लोबिन मात्र 7 ग्राम/डीएल है, जो गंभीर एनीमिया की स्थिति को दर्शाता है।
अनुराधा ने उन्हें समझाया कि शरीर में खून ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को प्रत्येक कोशिका तक पहुंचाने का काम करता है। लाल रक्त कणिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ढोता है, जबकि सफेद रक्त कणिकाएं शरीर को बीमारियों से बचाती हैं और प्लेटलेट्स रक्तस्राव रोकने में मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि आयरन, विटामिन बी-12, फोलिक एसिड और विटामिन-सी की कमी, बार-बार रक्तस्राव, पेट के कीड़े, बवासीर तथा कुछ आनुवंशिक कारणों से एनीमिया हो सकता है।
सुमित्रा को संतुलित आहार लेने, हरी पत्तेदार सब्जियां, मुनगा, चुकंदर, अनार, आंवला, पपीता, दालें, अंकुरित अनाज, अंडा, मछली, दूध एवं दही का सेवन करने की सलाह दी गई। साथ ही आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां नियमित रूप से लेने और भोजन के साथ नींबू का उपयोग करने की जानकारी दी गई। यह भी समझाया गया कि आयरन की गोली खाली पेट नहीं लेनी चाहिए तथा गोली लेने के दो घंटे पहले और बाद तक चाय, कॉफी, दूध या कैल्शियम की गोली का सेवन नहीं करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करते हुए सुमित्रा ने लगातार छह माह तक संतुलित आहार और आयरन सप्लीमेंट लिया। नियमित जांच और उपचार के बाद उनकी कमजोरी दूर हो गई, सांस फूलना बंद हो गया और वे फिर से पहले की तरह स्वस्थ होकर अपने दैनिक कार्य करने लगीं।
छह माह बाद समीक्षा बैठक में मितानिन जानकी, एएनएम अनुराधा और सुमित्रा तीनों ने इस सकारात्मक बदलाव पर खुशी जताई। सुमित्रा ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब समझ में आया कि खून की कमी कोई शर्म की बात नहीं है। समय पर जांच, सही इलाज और पौष्टिक भोजन से इसका इलाज पूरी तरह संभव है।”
पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एफ.आर. निराला ने लोगों से अपील की है कि यदि लगातार कमजोरी, थकान या सांस फूलने जैसी समस्या हो तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराकर उपचार शुरू करने से एनीमिया पर आसानी से काबू पाया जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।





