रायगढ़। रायगढ़ जिले में हर साल धान खरीदी में अनियमितता के कारण सरकार को लाखों का नुकसान होता है। इसके बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं होती क्योंकि दागी समितियों को अफसरों का संरक्षण मिलता है। गत वर्ष भी लैलूंगा और सारंगढ़ की कई समितियों में घपला हुआ लेकिन अब तक किसी पर एफआईआर नहीं हो सकी है। धान की फर्जी बिक्री करने के लिए लैलूंगा ब्लॉक की आधा दर्जन समितियों में किसानों का रकबा बढ़ा दिया गया। किसानों के नाम पर धान बेचने के बाद राशि आपस में बांट ली गई। लैलूंगा, राजपुर, बीरसिंघा, लारीपानी समेत सारंगढ़ की कई समितियों में गड़बड़ी की गई है। जांच केवल दो ही समितियों में की गई। जांच में करीब सौ किसानों के रकबे में छेड़छाड़ किया जाना पाया गया है। अब तक एक भी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं सबसे ज्यादा गड़बड़ी लैलूंगा समिति में हुई है। जांच हुए कई महीने बीत चुके हैं। भुगतान भी हो चुका है। बारदाने के हिसाब में भी गड़बड़ी मिली है। जितने बारदानों में धान खरीदा गया है, वे कहां से आए, लेखा मिलान में यह गड़बड़ी पकड़ी गई है । खाद्य विभाग, सहकारिता, और मार्कफेड के अधिकारियों ने जिम्मेदारों को कार्रवाई से बचाया है।
बोनस का भुगतान भी नहीं रोका
धान खरीदी में गड़बड़ी पकड़ी जाने के बाद भी बोनस भुगतान को नहीं रोका गया। जिन खातों में रकबा बढ़ाया गया, अगर उन खातों में भुगतान रोका जाता तो बोनस बचाया जा सकता था। बढ़े हुए रकबे पर एमएसपी और 2500 रुपए के बीच की अंतर राशि का भुगतान रोका जाना था। इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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