पलारी। छत्तीसगढ़ संस्कृत छात्र संगठन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राजनारायण द्विवेदी उपाध्यक्ष डॉ.कोमल वैष्णव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि प्रदेश में राजधानी रायपुर में एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय है जहां पर वेद, व्याकरण, ज्योतिष , संस्कृत साहित्य आदि की पढ़ाई संस्कृत भाषा में होती है जहां पर शासन ने अंग्रेजी भाषा के माध्यम से पढ़ाई करने का फैसला लिया है जो संस्कृत संस्कृति और संस्कार के लिए कतई उचित नहीं है। प्रदेश में संस्कृत भाषा के संवर्धन संरक्षण और प्रचार प्रसार के लिए राजेश्री महंत वैष्णव दास जी ने करोड़ों का जमीन दान दिया था ताकि लोगों को संस्कृत भाषा का ज्ञान हो सके । उनके मंशा के अनुरूप यहां वेद व्याकरण ज्योतिष पुराण उपनिषद् संस्कृत साहित्य आदि की पढ़ाई होती है यहां की लाइब्रेरी काफी समृद्ध है यहां करीब करीब 31000किताबे है इनमें 1047हस्तलिखित है। यहां प्रसिद्ध दार्शनिक ओशो रजनीश भी अध्यापक रह चूके हैं तथा सांसद कवि संत पवन दीवान विद्यार्थी रहे हैं अतः प्रदेश के एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय की एक विशिष्ट पहचान है। संस्कृत भाषा के संवर्धन संरक्षण और प्रचार प्रसार के लिए स्वामी विवेकानंद , महाकवि कालिदास, महर्षि वाल्मीकि, संत श्री गहिरा गुरु स्वामी आत्मानंद जैसे अनेक विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। अतः इस प्राचीन संस्कृत महाविद्यालय में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने का फैसला बिल्कुल न्यायसंगत नहीं है सभी संस्कृत विद्वज्जनों ने इसका घोर विरोध किया है। संस्कृत छात्र संगठन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राजनारायण द्विवेदी डॉ.कोमल वैष्णव राजकपूर साहू, महेंद्र वैष्णव रामप्रसाद साहू तारूण साहू गोपेश तिवारी राजेश तिवारी मनहरण यदु करुणा साहू रामानुज ढीढी बहुरन सिंह पटेल वैभव कान्हे हरिओम देवांगन मनोज वर्मा भगवानी निषाद रंजन मोड़क कौशलेश साहू टीभूराम गंगबेर नरेश विश्वकर्मा आदि ने छत्तीसगढ़ शासन से संस्कृत महाविद्यालय में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने के फैसले को वापस लेने तथा संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना शीघ्र करने की मांग किए हैं ।इस विषय में प्रदेश शासन को शीघ्र ज्ञापन सौंपा जाएगा।

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