सारंगढ़: “सारंगढ़ हुवा पानी- पानी”… बरमकेला – सरिया मे बाढ़ की हालत, हज़ारों एकड़ फ़सल पानी मे डूबा,आफत की बारिश से अन्नदाता चिंतित….
जगन्नाथ बैरागी
रायगढ़। रायगढ़ जिले मे अनवरत हो रहे बरसात से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। मूसलाधार बारिश की वजह से छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े बाँध गंगरेल के अधिकतम फाटको को खोल दिया गया है जिससे चंद्रपुर, सरिया के टतीय क्षेत्रो मे बाढ़ जैसे हालत हो गये हैँ, सारंगढ़ मे विगत 6- 7 दिनों से लगातार बारिश होने के कारण हर जगह पानी पानी नजर आ रहा है, कई कच्चे मकान टूट गये हैँ तो कहीं पेड़ और बिजली खम्भों की टूटने की जानकारी प्राप्त हो रही है।
सरिया बरमकेला के कई गांव डूबने से लोग दहशत में रतजगा करने मजबूर हैं। वहीं, सारंगढ में बिलासपुर मार्ग बंद हो गया है। पोरथ मन्दिर महानदी के आगोश में है तो लात नाला का जल स्तर बढ़ने से चन्द्रपुर बरमकेला मार्ग में 3 रोज से आवागमन अवरुद्ध है । बाढ़ के हालात को देख प्रशासन भी हाई मोड में रहकर तटवर्ती क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में शिफ्ट कराते हुए राहत और बचाव कार्य में जुटी है।
चन्द्रपुर से सरिया बरमकेला रुट भी बाधित है। रायगढ़ से सरिया होकर सारंगढ़ जाने वाले मार्ग पर लात नाला के आसपास के इलाके भी डूब चुके हैं। महानदी के रौद्ररूप को देख प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर चन्द्रपुर पुल से आवाजाही बन्द करा दिया – सारंगढ़ की एसडीएम मोनिका वर्मा ने बताया कि महानदी से लगे सरिया के पोरथ, विश्वासपुर, ठेंगागुड़ी, टोरो, रोबो समेत 8 गांव डूब गए हैं तो सरिया, लुकापारा, भीखमपुरा और सांकरा सहित 7 जगह राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। दरअसल, महानदी में गंगरेल से पानी छोड़ने के कारण सराईपाली और बसना तरफ से पानी आता है जो जाम होकर टिमरलगा एवं लातनाला सहित डर्द गिर्द क्षेत्र में फैलते हुए बाढ़ का रूप धर लेता है। महानदी के तटवर्ती इलाके में बसे गांव भी इसकी चपेट में आकर प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि जिले में बाढ़ के खतरे को देख कलेक्टर रानू साहू प्रशासनिक अमले के साथ राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। बताया जाता है कि प्रशासन द्वारा तटवर्ती इलाके में राहत शिविर लगाते हुए प्रभावित परिवार को सुरक्षित रखने का अभियान जारी है। यही नहीं , नगर सैनिक के तैराकों की 3 टीम भी बनाई गई है जो सारंगढ़ , सरिया एवं बरमकेला में तैनात है।

आफत की बरसात मे डूबा हजारों एकड़ फसल-
सारंगढ़ बिलासपुर रोड़ में शिवरीनारायण पुल में पानी आने के कारण से आवागमन बंद है। जबकि, सारंगढ़ रायगढ़ रोड़ के टिमरलगा में बीती रात सड़क के ऊपर पानी आने के कारण से आवागमन सुबह तक बंद होने की है। चंद्रपुर से बरमकेला मार्ग पर लातनाला तो 3 रोज से बंद है। ऐसे हालात में बारिश को लेकर रेडजोन की चेतावनी है जिसके कारण से हालात और भी बिगड़ सकते हैं। वही राहत भरी बात यही है कि हीराकुंड़ बांध के कई गेट खोले गए हैं जिसके कारण बाढ़ के पानी के जल्द उतरने के आसार हैं। बताया जाता है कि लगभग 97 प्रतिशत जलभराव वाले गंगरेल बांध मे लगातार हो रही पानी की आवक को देखते हुए 20 से अधिक गेट छोड़ दिया गया है। इसके कारण महानदी में काफी तेजी से जलस्तर बढ़ता जा रहा है। सारंगढ़ अंचल में लगातार हुई मूसलाधार बारिश से नालो में पानी की प्रचुरता काफी ज्यादा है। क्षेत्र के छोटे नालों का पानी महानदी में जाकर समाहित होता है, किन्तु गंगरेल बांध से पानी छोड़ने के कारण पहले से ही महानदी में पानी का प्रवाह

काफी तेज है। ऐसे में महानदी में समाने वाले लातनाला का पानी टिमरलगा में ठहर गया है और खदानों में शत प्रतिशत पानी भराव होने के बाद अब पानी उल्टा होकर बीच बस्ती में अपनी जगह तलाश रहा है, नतीजतन टिमरलगा में बाढ़ का घुसपैठ शुरू हो गया है। महानदी के रौद्र रूप से नदी के तटीय इलाकों में पानी के कहर से सारंगढ़ अंचल के दर्जन भर से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आने से लगभग एक हजार एकड़ से अधिक का फसल जलमग्न हो गया है।

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