रायगढ़: गोबर छान के वर्मी कंपोस्ट के नाम पर बेच रहे हैं किसानो को…! वर्मी कंपोस्ट की बोगस बिक्री कर किसानों के साथ राज्य सरकार को बट्टा लगाने की कोशिश….

IMG-20220810-WA0005.jpg
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.35 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.33 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.36 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.26 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.29 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.29 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.36
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.33 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.36 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.35
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.29
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.35 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.34

रायगढ़। गोबर छान के वर्मी कंपोस्ट के नाम पर बेच रहे अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी ने विभायीय मीटिंग में काटा बवाल, वीडियो हुआ वायरल,आंखों में रागी झोंकने वाले अधिकारी से सावधानमुख्यमंत्री भूपेश बघेल की गोधन न्याय योजना की जहां पूरा देश तारीफ करते नहीं थक रहा है वहीं उनके अपने ही विभाग के लोग इस योजना पर पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। रायगढ़ कृषि विभाग द्वारा वर्मी कंपोस्ट की बोगस बिक्री कर किसानों के साथ ही राज्य सरकार को बट्टा लगाने का काम किया जा रहा है।

WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.24
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.24 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.28 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.27
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.28
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.32 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.30
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.31 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.34 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.27 (3)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.27 (1)

रागी की आड़ में प्रशासन को चूना लगाने वाले कृषि विभाग में घोटाले अब समय बीतने के साथ सामने आने लगे हैं। बीते एक साल से खाद, बीज और रागी को लेकर आए दिन सुर्खियों में रहने वाले कृषि विभाग में अब वर्मी कंपोस्ट और नलकूप खनन घोटाले की खबरें आ रही हैं। सूत्र बताते हैं कृषि विभाग के अधिकारियों को गोठानों का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इन्हीं गोठानों के गोबर से यहीं महिला स्व सहायता समूह वर्मी कंपोस्ट खाद बनाती है। गोठानों में खाद नहीं होने के बाद भी इसे कागजों में बेच दिया गया और महिला स्व सहायता समूहों के खाते में पैसे भी आ गए। यहां एक उदाहरण से समझते हैं कि पुसौर के दाउभठली गोठान जहां खाद था ही नहीं वहां से 19 मार्च 2022 को सहकारी समिति बड़े हल्दी को 1.07 लाख किलो वर्मी कंपोस्ट देने का आर्डर निकल गया (क्यू आर कोड जनरेट करना), बड़े हल्दी सहकारी समिति के मार्फत अपेक्स बैंक ने 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 10 लाख 73 हजार 700 रुपये का भुगतान हो गया। पर किसानों को पूरा खाद अभी तक नहीं मिला है क्योंकि गोठान में खाद है ही नहीं। जब गोठान में खाद नहीं है तो उसकी बोगस बिक्री का षड़यंत्र क्यों रचा जा रहा है। यहां बात एक ब्लॉक के एक गोठान के एक ऑर्डर की हुई है। विभागीय जांच हो तो सिर्फ वर्मी कंपोस्ट घोटाला करोड़ों तक पहुंच जाए तो कोई आश्यर्च नहीं होगा। पुसौर विकासखंड में 51 गोठान हैं। पूरे जिले में 9 विकासखंडों में 545 और 10 नगरीय निकाय में 10 मिलाकर कुल 555 गोठान हैं।

WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.25
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.25 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.31 (3)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.32 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.29
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.31
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.32
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.29 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.27 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.30 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.33
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.31 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.26
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.34 (2)

केचुआ खाद से जुड़ी एक और मजेदार बात यह है कि यह 45-60 दिनों में खराब हो जाता है ऐसे में क्यूआर कटने के दो महीने के भीतर ही इसकी डिलिवरी किसानों को करनी होती है पर जिले में कई महीनों के कटे हुए क्यूआर हैं अर्थात वह खरीदी ही समाप्त हो गई और राज्य सरकार को भारी राशि चुकानी पड़ रही है। गोठानों में खाद नहीं है जो किसान सीधे वहां जाकर वर्मी कंपोस्ट खरीद रहे हैं उन्हें गोबर छान कर दिया जा रहा है। अब जब किसानों को खेती किसानी के लिए केचुआ खाद देने की बारी आई है तो गोठान के कर्मी गोबर छानकर वर्मी कंपोस्ट के नाम पर दे रहे हैं। सीधे तौर पर पुसौर के प्रभारी एसएडीओ शामिल हैं जो अपने कर्मचारियों पर दबाव बनाते हुए कार्य कर रहे हैं। इसी तरह जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) की राशि भी गोठानों में गोधन न्याय योजना के तरह खर्च की जानी थी लेकिन राशि गई तो सिर्फ अधिकारियों की जेब में। मद से जो सामग्रियां आनी थी और किसानों तक पहुंचनी थी उसका बंदरबाट की गई।

WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.35
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.36 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.38
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.38 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.37
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.38 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.37 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.37 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.40 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.39
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.39 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.40 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.36
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.39 (1)

वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी का वीडियो हुआ वायरल

WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.40
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.45
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.43
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.44
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.42
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.44 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.42 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.44 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.46 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.42 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.41
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.43 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.41 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.43 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.45 (1)

बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया में कथित तौर पर पुसौर के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी फकीर चंद साव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को तूल और मिली जब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक नेता ने इसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मुख्यमंत्री को टैग कर दिया। कृषि विभाग के सूत्र बताते हैं कि जैसा वीडियो में दिख रहा है कि साव साब तैश में आकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों और उप संचालक कृषि हरीश राठौर के समक्ष ही भरी मीटिंग में तोड़फोड़ कर रहे हैं। साव साब अपने मातहतों में दबाव बनाने के लिए इस प्रकार के तमाशे करते हैं लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही हो गया और वह भूल गए कि डीडीए कृषि भी बैठक में बैठे हैं। विभाग के जुड़े लोग बताते हैं कि साहब की पुसौर डायरी इतनी लंबी हो गई थी ग्रामीण विरोध पर आ गए थे बैठक में इसी बात पर चर्चा शुरू हुई थी कि साहब ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया और सब चुप हो गए। इतने चुप कि 7-8 महीने तक किसी ने कुछ नहीं बोला। अब साहब से किसी की सेटिंग खराब हो गई होगी तो इतने दिनों बाद मीटिंग का जिन्न वीडियो के रूप में बाहर निकला।यानी वीडियो वाली घटना 7-8 महीने पुरानी।

नलकूप घोटाले की जांच जारी

किसानों को खेती के लिए नलकूप लगाने की स्वीकृति और प्रबंध कृषि विभाग ही करता है। नियमानुसार नलकूप खोदाई किसान समृद्धि योजना के तहत होती है जिसमें 300 मीटर के दायरे में कोई दूसरा नलकूप नहीं खोदा जा सकता। लेकिन फकीर चंद साव ने अपने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के कार्यकाल में कई फर्जी नलकूप लगवाएं हैं, जिनकी जांच जारी है।

कनवर्जन का खेल

100 किलो गोबर से जितने किलो खाद बनता है उसे ही कनवर्जन कहते हैं। यानी 30 किलो खाद बना तो कनवर्जन रेट 30 प्रतिशत हुआ। विभाग द्वारा गोठानों को 40 फीसदी कनवर्जेशन का टारेगट दिया है। आरोप है कि एसएडीओ साव ने तो कलेक्टर की गुड बुक में आने के लिए 45 प्रतिशत तक कनवर्जन रेट दिखाया है। वो भी ऐसे समय में जब केचुआ 45 डिग्री के तापमान में बच नहीं सकता क्योंकि शेड तो कब के गायब हो चुके हैं।

इतने विवादित अधिकारियों को किसका सह –

फकीर चंद साव शुरुआत से ही विवादित अधिकारी रहें है। किसानों ने इनकी कई दफे इनकी लिखित में शिकायत की है कि निशुल्क प्रदाय की जाने वाली खाद,बीज और कीटनाशक को व्यापारियों और किसानों की सीधे तौर पर बेचता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के आवेदनों को लेने के लिए भी किसानों से पैसा लेते हैं। मातहत कर्मचारियों ने भी फकीर चंद साव की लिखित शिकायत डीडीए से की है पर आज पर्यंत तक कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि ऐसे अधिकारी किससे शह पर गोठान से खिलवाड़ कर रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

उप संचालक कृषि (डीडीए) हरीश राठौर ने बताया कि जो वीडियो वायरल हुआ है वह 7-8 महीने पुराना है विवाद को मौके पर ही सुलझा दिया गया था। इस मामले में कोई नोटिस नहीं दिया गया। जब वर्मी कंपोस्ट गोठान में होता है तो उसके बाद समितियों के माध्यम से उसका भंडारण करा कर विक्रय कराया जाता है। अगर इसको लेकर फर्जीवाड़े की बात है तो जांच जरूर की जाएगी। नलकूप मामले की जांच उच्चाधिकारी कर रहे हैं। रही बात प्रभारी एसएडीओ फकीर चंद साव की साथी अधिकारियों-कर्मचारियों की शिकायत की जांच पर डीडीए ने पूर्व कलेक्टर के द्वारा परफॉर्मेंस के आधार पर फकीर साव को बढ़ावा देने की बात में दब गई।

वहीं अपने ऊपर लगे आरोपों पर फकीर चंद साव ने कहा उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है वह लोकल हैं और लोकल लोगों का भला करते हैं। पूर्व कलेक्टर भीम सिंह ने उन्हें बेहतर कार्य का रिवार्ड देकर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी का प्रभार सौंपा है। रागी में काम अच्छा किया था। हालांकि जमीनीं हकीकत इससे काफी दूर है। वर्मी कंपोस्ट नहीं होने के बाद भी बचेने के लिए आर्डर (क्यूआर जनरेट) करने को फकीर ने इसे प्रोटोकाल बताया कि ऐसा ही होता है।

WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.49 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.50 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.51 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.50 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.47
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.48 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.51
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.49
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.51 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.48
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.47 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.46
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.48 (1)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.47 (2)
WhatsApp Image 2026-01-27 at 19.27.50

Recent Posts